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May 12, 2026 11:21 am

पाकिस्तान की दोहरी चाल बेनकाब, अमेरिका से मध्यस्थता की बात और चोरी-छिपे ईरान की मदद

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पाकिस्तान एक बार फिर अपनी कथित दोहरी नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है। एक तरफ पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय शांति और मध्यस्थता की भूमिका में पेश करता रहा, वहीं दूसरी ओर उस पर ईरान को गुप्त रूप से मदद पहुंचाने के आरोप लगे हैं। हालिया खुलासों के बाद पाकिस्तान की कूटनीतिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने कथित तौर पर अपने नूर खान एयरबेस पर ईरान के सैन्य विमानों को छिपाकर सहायता पहुंचाई। दावा किया जा रहा है कि यह गतिविधियां बेहद गोपनीय तरीके से संचालित की गईं ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खासकर अमेरिका की नजरों से बचा जा सके। इस खुलासे के बाद अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों में चिंता बढ़ गई है।

जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से वैश्विक मंच पर खुद को मध्यस्थ और शांति समर्थक देश के रूप में पेश करता रहा है। अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को मजबूत दिखाने की कोशिशों के बीच इस तरह की खबरें सामने आना उसके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। खास तौर पर ऐसे समय में, जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है, पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नए सवाल उठ खड़े हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान और ईरान के बीच सुरक्षा और सामरिक सहयोग लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर जारी रहा है, लेकिन इस बार सामने आए आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि ईरानी सैन्य विमानों को अस्थायी रूप से सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया गया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर असर पड़ सकता है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की नजर अब पाकिस्तान की गतिविधियों पर और ज्यादा सख्त हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो इससे पाकिस्तान की विदेश नीति और उसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर पड़ सकता है। साथ ही, यह घटनाक्रम अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में नई तनावपूर्ण स्थिति भी पैदा कर सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान की यह कथित रणनीति एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की नीति भी। लेकिन इस तरह के खुलासों से उसकी “दोहरी भूमिका” की छवि और मजबूत होती दिखाई दे रही है। अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अमेरिका और अन्य देशों की प्रतिक्रिया क्या रहती है और पाकिस्तान किस तरह अपना पक्ष रखता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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