वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि जुलाई में तुर्की से लौटते समय उन्होंने सुरक्षा कारणों से चुपचाप अपना विमान बदला था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह कदम ईरान से जुड़े संभावित खतरे की आशंका के बीच उठाया गया था। ट्रंप को आधिकारिक विमान Air Force One से अलग कर एक अन्य सैन्य विमान में स्थानांतरित किया गया, जबकि मूल विमान को आगे रवाना किया गया।
कैटरिंग ट्रक से किया गया गुप्त ट्रांसफर
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप को एयरपोर्ट पर एक कैटरिंग ट्रक के जरिए Air Force One से बाहर निकाला गया और दूसरे विमान तक पहुंचाया गया। इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया। ट्रंप के साथ मौजूद प्रेस और कुछ अधिकारियों को भी तत्काल इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।
इसके बाद Air Force One को निर्धारित यात्रा पर रवाना किया गया। इसी वजह से इस विमान को एक तरह के ‘डिकॉय’ के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की चर्चा शुरू हुई। हालांकि, अधिकारियों ने इस ऑपरेशन की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की है।
ईरानी खतरे की आशंका क्यों बढ़ी?
रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को ट्रंप के खिलाफ संभावित ईरानी खतरे की जानकारी मिली थी। इसी आधार पर Secret Service और सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए। ट्रंप ने बाद में कहा कि उन्हें सुरक्षा टीम के निर्देशों का पालन करना था और उन्हें लगातार धमकियां मिलती रहती हैं।
हालांकि, ट्रंप ने इस खतरे को लेकर अलग-अलग टिप्पणियां भी कीं और कहा कि उन्हें खतरे की जानकारी थी, लेकिन वह इसे लेकर अत्यधिक चिंतित नहीं थे।
Air Force One में मौजूद लोगों को नहीं थी जानकारी
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ज्यादा चर्चा वाला पहलू यह है कि मूल विमान में प्रेस के सदस्य और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें यह नहीं बताया गया था कि ट्रंप विमान से निकल चुके हैं। बाद में इस व्यवस्था को लेकर सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठे।
कुछ आलोचकों ने सवाल उठाया कि अगर खतरा इतना गंभीर था कि राष्ट्रपति को अलग विमान में भेजना जरूरी समझा गया, तो मूल विमान में मौजूद लोगों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि राष्ट्रपति की लोकेशन को गुप्त रखना सुरक्षा अभियानों का हिस्सा हो सकता है।
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान बदलने का फैसला उनकी सुरक्षा टीम और सैन्य अधिकारियों की सलाह पर किया गया था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उन्हें संभावित खतरे के कारण अपनी यात्रा व्यवस्था बदलनी पड़ी थी।
इस खुलासे के बाद अमेरिकी प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई गोपनीय रणनीति कितनी जरूरी थी और इसमें प्रेस तथा अन्य यात्रियों को अनजान रखने का फैसला क्यों किया गया।
अब क्यों चर्चा में है मामला?
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश यात्रा आमतौर पर कड़ी सुरक्षा और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत होती है। लेकिन इस मामले में राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर एक अलग विमान और गुप्त ट्रांसफर का इस्तेमाल किया गया।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने सुरक्षा खतरे की आशंका के बीच विमान बदला था और Air Force One को भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया। इस पूरे ऑपरेशन को लेकर सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रेस को जानकारी न दिए जाने पर बहस जारी है।








