उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में 16 वर्षीय एक नाबालिग की रहस्यमयी मौत का मामला 52 दिन बाद उस समय फिर सुर्खियों में आ गया, जब प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में उसकी कब्र खोदकर शव को बाहर निकाला गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाबालिग की मौत सामान्य नहीं थी, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच और पोस्टमार्टम दोबारा कराए जाने की मांग की जा रही थी।
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन सुबह-सुबह इलाके में चीख-पुकार सुनाई दी थी। कुछ देर बाद नाबालिग अपने घर में मृत मिला। शुरुआती स्तर पर इसे सामान्य मौत माना गया और शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि, परिजनों ने बाद में मौत को संदिग्ध बताते हुए कई गंभीर सवाल उठाए और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
परिजनों का कहना है कि घटना से पहले घर का दरवाजा अंदर से बंद था और परिस्थितियां सामान्य नहीं लग रही थीं। उनका आरोप है कि मौत के पीछे किसी साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने और पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की। शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संबंधित अधिकारियों ने मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव को कब्र से निकालने की अनुमति दी।
करीब 52 दिन बाद प्रशासन, पुलिस, फॉरेंसिक टीम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में शव को कब्र से बाहर निकाला गया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को दोबारा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि मौत के सही कारणों का पता वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर मौजूद रहे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखने की अपील की है।
फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। जांच अधिकारी परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। साथ ही घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नाबालिग की मौत प्राकृतिक थी, दुर्घटनावश हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक कारण था। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।








