लोकसभा में राजनीतिक समीकरणों में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों को एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना में विलय की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने अलग बैठने का फैसला किया है, जो संसद में नया सियासी घमासान पैदा कर सकता है।
स्पीकर बिरला का फैसला
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों को शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब शिंदे गुट की शिवसेना की ताकत और बढ़ गई है।
स्पीकर बिरला ने कहा कि यह फैसला एंटी-डिफेक्शन लॉ और संबंधित नियमों के अनुसार लिया गया है। उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों ने शिंदे गुट में विलय के लिए आवेदन किया था, जिसे मंजूरी मिल गई है।
TMC में बगावत
इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने भी बड़ा कदम उठाया है। वे अब लोकसभा में अलग से बैठेंगे। TMC के ये बागी सांसद पार्टी के कुछ फैसलों से नाराज बताए जा रहे हैं।
TMC सूत्रों के मुताबिक, ये सांसद पार्टी की आंतरिक कलह और कुछ मुद्दों पर असहमति के चलते अलग बैठने का फैसला किया है। इससे TMC की संसदीय ताकत पर असर पड़ सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
- शिवसेना (शिंदे गुट): इस फैसले का स्वागत किया गया। एकनाथ शिंदे गुट ने इसे अपनी जीत बताया।
- उद्धव ठाकरे गुट: फैसले पर नाराजगी जताई गई। उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं ने इसे “असंवैधानिक” बताया।
- TMC: पार्टी ने बागी सांसदों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
- BJP: इस विकास पर खुशी जताई गई।
संसद पर असर
यह फैसला लोकसभा में विपक्ष की एकता को प्रभावित कर सकता है। TMC के 20 सांसदों के अलग बैठने से विपक्ष की संख्या कम हो सकती है, जबकि शिवसेना में विलय से शिंदे गुट मजबूत हुआ है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सभी पक्षों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की है।
अपडेट: स्थिति अभी भी विकसित हो रही है। उद्धव ठाकरे गुट और TMC दोनों ही इस फैसले के खिलाफ आगे कानूनी या राजनीतिक कदम उठा सकते हैं।








