NEET पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे का इंतजार अब बड़ा सवाल बन गया है। 25 जुलाई को लंबे छात्र आंदोलन को खत्म कराने के दौरान सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन सामने आया था। लेकिन एक महीने बाद भी प्रभावित परिवारों का दावा है कि उन्हें अब तक मुआवजे को लेकर किसी सरकारी अधिकारी की ओर से संपर्क नहीं किया गया है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, NEET विवाद से जुड़े 22 छात्रों की मौत के बाद उनके परिवारों की स्थिति जानने के लिए रिपोर्टर टीम ने 14 परिवारों से संपर्क किया। रिपोर्ट में यूपी, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दिल्ली और मध्य प्रदेश के परिवारों से बातचीत का जिक्र है। इन परिवारों ने बताया कि उन्हें अभी तक सरकार की ओर से मुआवजे के संबंध में कोई जानकारी या सहायता नहीं मिली है।
25 जुलाई को खत्म हुआ था आंदोलन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में करीब 36 दिनों तक आंदोलन चला था। प्रदर्शन के दौरान CJP ने छात्रों और उनके परिवारों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। 25 जुलाई को सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के बाद प्रदर्शन खत्म किया गया।
उस समय सामने आए प्रमुख आश्वासनों में NEET विवाद में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल थी। सरकार की ओर से मुआवजे के मामले में नियमों के अनुरूप अधिकतम संभव सहायता देने की बात कही गई थी।
परिवारों का दावा- अब तक कोई संपर्क नहीं
रिपोर्ट में जिन 14 परिवारों से बातचीत का जिक्र है, उनमें से कई ने कहा कि आंदोलन खत्म होने के बाद न तो सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने आया और न ही मुआवजे की प्रक्रिया के बारे में उन्हें जानकारी दी गई।
कुछ परिवारों ने यह भी बताया कि उनके लिए आर्थिक सहायता से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उनके बच्चों की मौत के मामले में उन्हें न्याय और प्रशासनिक मदद मिले। कई परिवारों पर अपने बच्चे को खोने का गहरा असर है और वे चाहते हैं कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने।
CJP पर भी परिवारों ने उठाए सवाल
रिपोर्ट में कुछ परिवारों ने दावा किया कि आंदोलन के दौरान उनके बच्चों के नाम पर मुद्दा उठाया गया, लेकिन आंदोलन खत्म होने के बाद CJP की ओर से भी उनसे संपर्क नहीं किया गया।
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने रिपोर्ट के अनुसार कहा कि संगठन ने मुआवजे के मुद्दे पर सरकार को पत्र लिखा है, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला। संगठन ने इसी मुद्दे को लेकर दोबारा आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार की ओर से 25 जुलाई को कहा गया था कि NEET पेपर लीक के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति पूरी संवेदना है और नियमों के अनुसार अधिकतम मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा। इसका मतलब यह था कि सहायता की प्रक्रिया मौजूदा नियमों और पात्रता के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।
यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आश्वासन के बाद मुआवजा देने की प्रक्रिया कब शुरू होगी और प्रभावित परिवारों तक सहायता कब पहुंचेगी।
5 सितंबर को फिर मार्च की तैयारी
मुआवजे और अन्य लंबित मांगों को लेकर CJP ने दोबारा सड़क पर उतरने का ऐलान किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, संगठन ने 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की योजना बनाई है। इसमें NEET पीड़ित छात्रों के परिवारों को भी शामिल करने की बात कही गई है।
फिलहाल NEET विवाद में मुआवजे का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में है। एक तरफ परिवार अपने बच्चों को खोने के बाद सरकारी सहायता और जवाब का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ CJP सरकार पर किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर क्या कदम उठाती है और पीड़ित परिवारों को सहायता कब तक मिलती है।








