बॉलीवुड में धार्मिक विषयों और पौराणिक कथाओं पर फिल्में बनाने को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अभिनेता मुकेश खन्ना ने फिल्ममेकर्स के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए धार्मिक ग्रंथों और देवी-देवताओं के चित्रण पर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि फिल्मों में हिंदू धर्म और धार्मिक मान्यताओं को लेकर जिस तरह की रचनात्मक छूट ली जाती है, वैसा दूसरे धर्मों के मामले में करने की हिम्मत फिल्मकार नहीं दिखाते।
मुकेश खन्ना ने सवाल उठाया कि अगर फिल्म निर्माता मुस्लिम या सिख धर्म के धार्मिक प्रतीकों और मान्यताओं को लेकर इसी तरह का मजाक बनाकर दिखाएं, तो क्या वे ऐसा कर पाएंगे? उनके इस बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में धार्मिक संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
‘आज के बच्चों के लिए महाभारत बदल देंगे क्या?’
मुकेश खन्ना ने खास तौर पर फिल्म ‘आदिपुरुष’ का जिक्र करते हुए इसके निर्देशक ओम राउत और लेखक की आलोचना की। उनका कहना है कि फिल्म बनाने वालों ने इसे आज के बच्चों और नई पीढ़ी के हिसाब से पेश करने की बात कही थी। लेकिन सवाल यह है कि क्या नई पीढ़ी को पसंद आने के नाम पर रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथों की मूल कहानियों को बदलना उचित है?
एक्टर ने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर उनके पूर्वजों की जीवनशैली अलग थी, तो क्या आज के बच्चों को पसंद आने के लिए उनका पूरा व्यक्तित्व बदल दिया जाएगा? उनके मुताबिक, इतिहास और धार्मिक कथाओं को केवल मौजूदा दर्शकों की पसंद के आधार पर नहीं बदला जाना चाहिए।
अभिव्यक्ति की आजादी पर भी उठाए सवाल
मुकेश खन्ना ने फिल्ममेकर्स के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वाले तर्क पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जब भी धार्मिक विषयों पर फिल्मों में किए गए बदलावों को लेकर सवाल उठते हैं, तो निर्माता-निर्देशक अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर फिल्मकारों को अभिव्यक्ति की इतनी ही स्वतंत्रता है, तो दूसरे धर्मों के धार्मिक प्रतीकों और मान्यताओं को लेकर भी इसी तरह की फिल्में बनाकर दिखाएं। उनके मुताबिक, हिंदू धर्म के मामले में फिल्मकारों को लगता है कि कोई विरोध नहीं करेगा, इसलिए धार्मिक कहानियों के साथ बदलाव करना आसान समझ लिया गया है।
करणी सेना का भी किया जिक्र
मुकेश खन्ना ने अपने बयान में फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी संवेदनशील धार्मिक या ऐतिहासिक विषय पर फिल्म बनाने के बाद उसे रिलीज करने से पहले करणी सेना जैसे विरोध करने वाले संगठनों को दिखाया जाना चाहिए। इससे बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाने का रास्ता निकल सकता है।
एक्टर का मानना है कि फिल्मों को लेकर कई बार टीवी डिबेट और विरोध-प्रदर्शन होते हैं, लेकिन अंत में फिल्म रिलीज हो जाती है और विवाद के कारण उसे प्रचार भी मिल जाता है। ऐसे में उन्होंने फिल्म निर्माताओं को धार्मिक विषयों पर काम करते समय अधिक जिम्मेदारी बरतने की सलाह दी।
पहले भी आदिपुरुष पर जता चुके हैं नाराजगी
यह पहली बार नहीं है जब मुकेश खन्ना ने ‘आदिपुरुष’ को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इससे पहले भी वह फिल्म के संवादों, किरदारों के लुक और रामायण की प्रस्तुति पर सवाल उठा चुके हैं। उनका मानना है कि रामायण और महाभारत केवल मनोरंजन की कहानियां नहीं हैं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ी हुई हैं।
फिलहाल मुकेश खन्ना के इस ताजा बयान ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में धार्मिक ग्रंथों पर आधारित फिल्मों की प्रस्तुति, रचनात्मक स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं के सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है।








