मानसून के दौरान बढ़ते संक्रमण और फूड प्वॉइजनिंग के मामलों को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आम लोगों के लिए नई सेफ्टी गाइडलाइंस जारी की हैं। इन दिशानिर्देशों में खास तौर पर किचन हाइजीन, खाने-पीने की सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वच्छता और बच्चों की देखभाल पर जोर दिया गया है।
मानसून में क्यों बढ़ता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में नमी और गंदगी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं। इस वजह से फूड प्वॉइजनिंग, डायरिया, पेट संक्रमण और वायरल बुखार जैसे मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है।
किचन हाइजीन पर विशेष ध्यान
FSSAI ने सलाह दी है कि रसोई में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। खाने की चीजों को ढककर रखें और कच्चे व पके भोजन को अलग-अलग स्टोर करें। बर्तनों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
इसके अलावा, सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर उपयोग करने और बासी भोजन से बचने की भी सलाह दी गई है।
पर्सनल हाइजीन है सबसे जरूरी
मानसून के दौरान हाथों की सफाई सबसे महत्वपूर्ण है। खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोना, गीले कपड़ों से बचना और साफ पानी का उपयोग करना संक्रमण से बचाव में मदद करता है।
बच्चों की सेहत पर खास ध्यान
गाइडलाइंस में बच्चों की सेहत को लेकर विशेष चेतावनी दी गई है। बच्चों को बाहर का खुला खाना देने से बचने और साफ-सुथरा भोजन उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है। साथ ही, उन्हें बारिश के पानी और गंदगी से दूर रखने की भी बात कही गई है।
खाद्य सुरक्षा के अहम सुझाव
- हमेशा ताजा खाना ही खाएं
- खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें
- पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं
- खाने को ढककर रखें
- बासी खाना तुरंत फेंक दें
निष्कर्ष
FSSAI की यह मानसून सेफ्टी गाइडलाइन लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर इन सावधानियों का पालन किया जाए, तो मानसून के दौरान होने वाली कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।








