नई दिल्ली। भारत के उभरते हुए लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐसा इतिहास रच दिया, जिस पर पूरे देश को गर्व है। पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है और गुलवीर सिंह रातों-रात देश के नए खेल सितारे बन गए हैं।
हालांकि, उनकी सफलता का यह सफर आसान नहीं था। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के एक साधारण किसान परिवार से आने वाले गुलवीर सिंह ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर खड़े होंगे। उनका शुरुआती सपना भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना था। सेना की शारीरिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए उन्होंने नियमित रूप से दौड़ना शुरू किया। धीरे-धीरे यह अभ्यास उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया और उन्होंने दौड़ को ही अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया।
सेना में भर्ती की तैयारी ने बदली जिंदगी
गुलवीर सिंह बचपन से ही मेहनती और अनुशासित रहे हैं। गांव की सड़कों और खेतों के बीच रोजाना कई किलोमीटर दौड़ लगाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। सेना में भर्ती की तैयारी के दौरान उनकी रफ्तार और सहनशक्ति ने कोचों का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण मिला और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया।
उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने के बाद भारतीय सेना ने भी उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। सेना में शामिल होने के बाद उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला। यही अनुभव उन्हें दुनिया के बेहतरीन धावकों के बीच प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करता गया।
राष्ट्रीय रिकॉर्ड से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक
गुलवीर सिंह ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने 5,000 मीटर और 10,000 मीटर जैसी लंबी दूरी की स्पर्धाओं में कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किए। एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने भारत के लिए उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह शुरुआत से ही अपनी गति को नियंत्रित रखते हैं और अंतिम चरण में जबरदस्त स्पीड के साथ प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ने की क्षमता रखते हैं। यही रणनीति उन्हें अन्य धावकों से अलग बनाती है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की 10,000 मीटर रेस बेहद चुनौतीपूर्ण रही। दुनिया के कई अनुभवी धावक इस मुकाबले में शामिल थे। गुलवीर सिंह ने शुरुआत में संयम बनाए रखा और पूरे रेस के दौरान अपनी रणनीति पर कायम रहे। अंतिम लैप में उन्होंने शानदार स्पीड दिखाई और दूसरे स्थान पर फिनिश करते हुए भारत के लिए ऐतिहासिक रजत पदक जीत लिया।
उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास लिख दिया। लंबे समय से जिस पदक का इंतजार था, उसे गुलवीर सिंह ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर हासिल कर लिया।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
गुलवीर सिंह की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों और गांवों से बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि सीमित संसाधन सफलता की राह में बाधा नहीं बनते, बल्कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।
आज गुलवीर सिंह केवल एक सफल एथलीट नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और देशभक्ति की मिसाल बन चुके हैं। सेना में भर्ती होने का सपना लेकर दौड़ शुरू करने वाले इस धावक ने अब कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच पर भारत का तिरंगा लहराकर करोड़ों देशवासियों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। उनकी यह सफलता आने वाले खिलाड़ियों को भी बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने की प्रेरणा देती रहेगी।








