सनावदिया, 25 अगस्त। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने वाली जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की निदेशक डॉ. जनक पलटा मगिलिगन (जनक दीदी) इस वर्ष अपना 41वां रक्षा-बंधन अनोखे अंदाज में मनाएंगी। पिछले 40 वर्षों से चली आ रही परंपरा को जारी रखते हुए वह इस बार भी राखी के पर्व को पौधरोपण और प्रकृति संरक्षण के संदेश से जोड़ेंगी।
जनक दीदी अपने पर्यावरण प्रेमी भाई-बहनों के साथ सनावदिया स्थित अपने घर ‘गिरिदर्शन’ के पीछे ‘दुतनी टेकरी’ पर सामूहिक रूप से पेड़-पौधे लगाएंगी। इस दौरान पौधरोपण के साथ उनकी देखभाल और संरक्षण का संकल्प भी लिया जाएगा।
रक्षा-बंधन को बनाया प्रकृति की रक्षा का पर्व
भारतीय संस्कृति में रक्षा-बंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। जनक दीदी ने इसी भावना को प्रकृति तक विस्तार देते हुए रक्षा-बंधन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ दिया है।
उनका संदेश है कि जिस तरह परिवार में एक-दूसरे की रक्षा की जिम्मेदारी निभाई जाती है, उसी तरह पेड़-पौधों और प्रकृति की रक्षा करना भी समाज की जिम्मेदारी है। इसी विचार के साथ वह पिछले चार दशकों से रक्षा-बंधन के अवसर पर पौधरोपण करती आ रही हैं।
40 साल से जारी है पौधरोपण की परंपरा
जनक दीदी के लिए यह पहल अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि चार दशक पुरानी परंपरा बन चुकी है। पिछले 40 वर्षों में रक्षा-बंधन के अवसर पर पौधरोपण के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया है।
हर साल इस पहल से जुड़ने वाले पर्यावरण प्रेमियों की संख्या बढ़ रही है। इन लोगों को ‘वृक्षमित्र’ के रूप में जोड़ा जा रहा है, जो पौधे लगाने के साथ उनके संरक्षण और देखभाल में भी योगदान देते हैं।
दुतनी टेकरी पर होगा सामूहिक पौधरोपण
इस वर्ष रक्षा-बंधन के मौके पर दुतनी टेकरी क्षेत्र में सामूहिक पौधरोपण किया जाएगा। आयोजन में पर्यावरण प्रेमी भाई-बहन शामिल होकर पौधे लगाएंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखकर बड़ा करना भी है। इसके लिए पौधरोपण के बाद नियमित देखभाल की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।
वन विभाग और जैविक सेतु का सहयोग
पौधरोपण और उसके बाद पौधों की देखभाल के लिए वन विभाग, मुख्य वन संरक्षक श्री पी.एन. मिश्रा और जैविक सेतु के सहयोग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनकी देखभाल को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि पौधरोपण तभी सार्थक है, जब लगाए गए पौधे जीवित रहें और भविष्य में पेड़ों का रूप लें। इसी कारण पौधों की देखभाल को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
बढ़ रहा है ‘वृक्षमित्रों’ का कारवां
जनक दीदी की इस पहल की खास बात यह है कि हर साल नए लोग पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान से जुड़ रहे हैं। पौधरोपण के माध्यम से लोग न केवल हरियाली बढ़ाने का संकल्प लेते हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझते हैं।
रक्षा-बंधन के अवसर पर होने वाला यह आयोजन भाई-बहन के रिश्ते के साथ इंसान और प्रकृति के रिश्ते को भी मजबूत करने का संदेश देता है।
पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश
आज बढ़ते प्रदूषण, गर्मी और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच पेड़-पौधों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में रक्षा-बंधन जैसे पारंपरिक त्योहार को पौधरोपण से जोड़ना लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का एक अनोखा तरीका है।
जनक दीदी का यह अभियान संदेश देता है कि रक्षा का संकल्प केवल रिश्तों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा तक भी पहुंचना चाहिए।
इस बार 41वें रक्षा-बंधन पर भी दुतनी टेकरी में पौधरोपण के जरिए यही संदेश दिया जाएगा कि राखी के धागे के साथ हरियाली की जिम्मेदारी भी निभाएं और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें।








