राजस्थान की राजधानी जयपुर से वैवाहिक विवाद से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। जयपुर की फैमिली कोर्ट-2 ने 13 साल पुराने विवाह को समाप्त करते हुए पति की तलाक याचिका मंजूर कर ली। इस मामले में पत्नी का दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखना, उसके नाम की मेहंदी लगाना और गोवा में उसके साथ विवाह जैसी रस्में निभाने से जुड़े तथ्य अदालत के सामने आए। अदालत ने इन परिस्थितियों को सामान्य दोस्ती से आगे का आचरण माना और वैवाहिक रिश्ते में विश्वास टूटने तथा मानसिक क्रूरता के पहलुओं पर विचार किया।
यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि करवा चौथ का व्रत भारतीय परंपरा में पति की लंबी उम्र और वैवाहिक रिश्ते की मजबूती की कामना से जुड़ा माना जाता है। हालांकि, इस मामले में तलाक का फैसला केवल व्रत रखने की एक घटना पर आधारित नहीं था। अदालत ने पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ी कई परिस्थितियों, प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को समग्र रूप से देखा।
13 साल पुरानी शादी को खत्म करने का फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पति-पत्नी का विवाह मई 2013 में हुआ था। वैवाहिक संबंधों में विवाद बढ़ने के बाद पति ने 27 जनवरी 2023 को अदालत में तलाक की याचिका दायर की। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी का दूसरे पुरुष के साथ व्यवहार सामान्य दोस्ती की सीमा से आगे बढ़ गया था और इससे वैवाहिक जीवन में विश्वास तथा मानसिक शांति प्रभावित हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने दोनों के वैवाहिक संबंधों से जुड़े कई तथ्य रखे गए। अदालत ने उपलब्ध मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों पर विचार किया। इसके बाद फैमिली कोर्ट-2 के न्यायाधीश विशाल भार्गव ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए विवाह विच्छेद का आदेश दिया।
दूसरे पुरुष के लिए रखा था करवा चौथ का व्रत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पति ने अदालत में आरोप लगाया कि पत्नी ने 24 अक्टूबर 2021 को गोवा में दूसरे पुरुष के साथ करवा चौथ मनाया और उसके लिए व्रत रखा। पत्नी द्वारा उस पुरुष के नाम की मेहंदी लगाने की बात भी सामने आई। इसके अलावा, दूसरे पुरुष के साथ गोवा में विवाह जैसी रस्में निभाने और उसके साथ पति-पत्नी की तरह व्यवहार करने से जुड़े तथ्य भी मामले में महत्वपूर्ण रहे।
अदालत ने इन परिस्थितियों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखने के बजाय वैवाहिक रिश्ते के व्यापक संदर्भ में परखा। अदालत के अनुसार, पत्नी का दूसरे पुरुष के प्रति व्यवहार सामान्य दोस्ती की सीमा से आगे था। इन तथ्यों ने पति-पत्नी के बीच विश्वास और वैवाहिक संबंधों पर पड़े असर का आकलन करने में अहम भूमिका निभाई।
मानसिक क्रूरता के पहलू पर भी हुआ विचार
तलाक की याचिका में पति ने मानसिक परेशानी और वैवाहिक जीवन में दूरी को लेकर भी आरोप लगाए थे। उसने दावा किया कि 2019 से उनके बीच शारीरिक संबंध नहीं थे और वैवाहिक साथ प्रभावित हो गया था। हालांकि, अदालत ने इस दावे की पूरी अवधि को स्वीकार नहीं किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों से यह सामने आया कि दोनों करीब एक साल और तीन महीने से अलग रह रहे थे।
अदालत ने मामले के दूसरे पहलुओं के साथ वैवाहिक साथ की कमी और रिश्ते में बढ़ते तनाव पर भी विचार किया। फैसला केवल शारीरिक संबंधों से जुड़े आरोप पर आधारित नहीं था, बल्कि दूसरे पुरुष के साथ पत्नी के व्यवहार, वैवाहिक विश्वास के टूटने और अन्य परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया।
पति के माता-पिता और बच्चे से जुड़े आरोप भी सामने आए
मामले में पति ने पत्नी पर उसके माता-पिता के साथ अनुचित व्यवहार करने और नाबालिग बेटे की उचित देखभाल नहीं करने के आरोप भी लगाए थे। अदालत के सामने परिवार से जुड़े इन पहलुओं का भी उल्लेख हुआ। हालांकि, इन आरोपों को पूरे मामले के संदर्भ में ही समझना जरूरी है; किसी एक आरोप को फैसले का अकेला कारण मानना सही नहीं होगा।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और घटनाओं की समग्र स्थिति पर विचार करते हुए निष्कर्ष निकाला कि वैवाहिक रिश्ते में विश्वास और मानसिक शांति बनाए रखना कठिन हो गया था। इसी आधार पर पति की तलाक याचिका स्वीकार की गई और विवाह समाप्त करने का आदेश दिया गया।
क्या करवा चौथ का व्रत रखना अपने आप तलाक का आधार है?
इस मामले के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या किसी दूसरे व्यक्ति के लिए करवा चौथ का व्रत रखना अपने आप तलाक का आधार बन सकता है। इस मामले की रिपोर्ट्स से स्पष्ट होता है कि अदालत ने केवल व्रत रखने की घटना पर फैसला नहीं दिया, बल्कि दूसरे पुरुष के साथ संबंधों से जुड़े अन्य तथ्यों और वैवाहिक जीवन की परिस्थितियों को भी देखा।
वैवाहिक विवादों में अदालतें प्रस्तुत साक्ष्यों और मामले की पूरी परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती हैं। इसलिए इस फैसले को इस तरह नहीं समझना चाहिए कि हर मामले में किसी दूसरे व्यक्ति के लिए व्रत रखने भर से तलाक मिल जाएगा। कानूनी निष्कर्ष मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करते हैं।
फैसले के बाद चर्चा में आया मामला
जयपुर फैमिली कोर्ट का यह फैसला करवा चौथ और वैवाहिक रिश्तों से जुड़े पहलुओं के कारण चर्चा में है। इस मामले में अदालत ने दूसरे पुरुष के साथ पत्नी के व्यवहार, विवाह में विश्वास की स्थिति और मानसिक क्रूरता से जुड़े पहलुओं पर विचार करने के बाद 13 साल पुराने विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि वैवाहिक विवादों में अदालत किसी एक घटना के बजाय पूरे घटनाक्रम और प्रस्तुत साक्ष्यों को ध्यान में रखती है। करवा चौथ के व्रत से जुड़ा पहलू सुर्खियों में जरूर है, लेकिन तलाक के फैसले को समझने के लिए उससे जुड़े अन्य तथ्यों और अदालत के समग्र निष्कर्षों को देखना भी जरूरी है।








