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October 5, 2026 12:22 pm

सीट नहीं, जीत जरूरी! सीट शेयरिंग पर खींचतान के बीच अखिलेश यादव का सहयोगियों को दो टूक संदेश

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर अंदरूनी खींचतान के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सहयोगी दलों को एक स्पष्ट संदेश दिया है। अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि चुनाव में सिर्फ ज्यादा सीटों पर दावा करना ही प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि गठबंधन का मुख्य लक्ष्य चुनाव जीतना होना चाहिए।

सीटों के बंटवारे को लेकर अलग-अलग दलों की अपनी-अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। ऐसे में सीट शेयरिंग का मुद्दा विपक्षी गठबंधन के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। कई सीटों पर संभावित दावेदारों और सहयोगी दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश जारी है। इसी बीच अखिलेश यादव का यह संदेश गठबंधन की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीटों से ज्यादा जीत पर जोर

अखिलेश यादव ने सहयोगियों के बीच सीटों की संख्या को लेकर होने वाली खींचतान से आगे बढ़कर चुनावी जीत पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है। उनका संदेश साफ है कि अगर गठबंधन को सत्ता की लड़ाई में मजबूत चुनौती पेश करनी है तो सभी दलों को अपनी व्यक्तिगत और पार्टीगत प्राथमिकताओं से ऊपर उठकर साझा रणनीति बनानी होगी।

सपा अध्यक्ष का मानना है कि गठबंधन की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि किस दल को कितनी सीटें मिलीं, बल्कि इस बात से होगी कि गठबंधन उम्मीदवार कितनी सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब होते हैं। इसलिए सीटों का बंटवारा राजनीतिक समीकरण, उम्मीदवार की मजबूती और संबंधित क्षेत्र में जीत की संभावना को ध्यान में रखकर किया जाना जरूरी है।

सहयोगियों के साथ तालमेल बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग दलों का अपना जनाधार और क्षेत्रीय प्रभाव है। ऐसे में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत आसान नहीं है। हर सहयोगी दल अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में अधिक सीटों की मांग कर सकता है। दूसरी ओर, सपा भी उन सीटों पर अपना दावा मजबूत रखना चाहेगी जहां उसका संगठन और चुनावी आधार मजबूत है।

ऐसे हालात में अखिलेश यादव का संदेश गठबंधन के भीतर सहमति बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सपा नेतृत्व सीटों की संख्या के बजाय उम्मीदवार की जीत की संभावना को अधिक महत्व देने की रणनीति पर आगे बढ़ना चाहता है।

उम्मीदवार चयन पर भी रहेगा फोकस

गठबंधन में सीट बंटवारे के साथ-साथ उम्मीदवारों का चयन भी अहम मुद्दा होगा। किसी सीट पर सहयोगी दल का संगठन मजबूत है तो किसी दूसरी सीट पर सपा का स्थानीय नेटवर्क बेहतर हो सकता है। ऐसे में गठबंधन के लिए यह तय करना महत्वपूर्ण होगा कि किस सीट पर किस दल का उम्मीदवार विपक्षी वोटों को एकजुट कर ज्यादा प्रभावी मुकाबला कर सकता है।

अखिलेश यादव के संदेश से यह संकेत मिलता है कि गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर ज्यादा जोर देने के बजाय जीत की संभावना के आधार पर फैसला लेने की कोशिश की जा सकती है।

विपक्षी वोटों को एकजुट रखने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबले में विपक्षी दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने समर्थक वोटों को एकजुट रखना है। यदि गठबंधन के दल अलग-अलग सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ दावेदारी करते हैं या टिकट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आते हैं, तो इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

इसी वजह से अखिलेश यादव का ‘सीट नहीं, जीत’ वाला संदेश गठबंधन के भीतर एकजुटता बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सपा नेतृत्व चाहता है कि सहयोगी दल सीटों की संख्या को प्रतिष्ठा का सवाल बनाने के बजाय ऐसी व्यवस्था पर सहमत हों, जिससे चुनाव में संयुक्त रूप से बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।

आगे की बातचीत पर टिकी निगाहें

अब नजर इस बात पर है कि सीट शेयरिंग को लेकर सहयोगी दलों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। चुनावी रणनीति तैयार करने के साथ-साथ प्रत्येक दल अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में मजबूत दावेदारी पेश करेगा। ऐसे में सीटों का अंतिम बंटवारा गठबंधन की चुनावी रणनीति के लिए बेहद अहम होगा।

फिलहाल अखिलेश यादव के संदेश से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सपा नेतृत्व गठबंधन के भीतर सीटों की संख्या को लेकर होने वाली खींचतान को कम करके चुनावी जीत को प्राथमिकता देना चाहता है। आने वाले दिनों में सहयोगी दलों के साथ बातचीत और सीटों पर सहमति से यह तय होगा कि विपक्षी गठबंधन इस रणनीति को जमीन पर किस तरह लागू करता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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