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October 26, 2026 4:12 pm

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अल्बानिया में छात्रों का उग्र प्रदर्शन, PM ऑफिस की कुर्सियां जलाईं; प्रधानमंत्री ने खुद रखी थीं, लिखा था- ‘बातचीत करें’

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अल्बानिया में छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ी एक घटना चर्चा में है। यहां प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर रखी गई कुर्सियों को आग के हवाले कर दिया गया। बताया जा रहा है कि ये कुर्सियां प्रधानमंत्री की ओर से बातचीत की पहल के तहत रखी गई थीं। इन पर लोगों को बातचीत के लिए आमंत्रित करने वाला संदेश भी लिखा था। लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान इन्हीं कुर्सियों को निशाना बनाया गया, जिससे राजनीतिक विरोध और सरकार के साथ संवाद को लेकर बहस तेज हो गई।

इस घटना की खास बात यह है कि जिन कुर्सियों को बातचीत के प्रतीक के तौर पर पेश किया गया था, वे ही प्रदर्शन के दौरान विरोध का केंद्र बन गईं। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों, छात्रों की प्रमुख मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया को समझने के लिए आधिकारिक बयानों तथा विश्वसनीय रिपोर्टों की जानकारी जरूरी है।

छात्रों का प्रदर्शन क्यों हो रहा है?

अल्बानिया में छात्रों का विरोध प्रदर्शन 13 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ था। शुरुआत में छात्रों ने विश्वविद्यालयों और छात्रावासों की सुविधाओं, पढ़ाई के खर्च, आर्थिक सहायता और पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के अवसरों जैसे मुद्दों को उठाया। धीरे-धीरे यह आंदोलन सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग भी उठाई है। सरकार ने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को खारिज किया है।

प्रधानमंत्री ने बातचीत के लिए रखवाई थीं कुर्सियां

विरोध के बीच प्रधानमंत्री एदी रामा ने 20 अक्टूबर को अपने कार्यालय के बाहर लाल रंग की कुर्सियां रखवाई थीं। इन पर ‘डायलॉग’ यानी बातचीत का संदेश लिखा गया था। प्रधानमंत्री की ओर से यह कदम छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बातचीत के लिए आमंत्रित करने के प्रतीक के तौर पर पेश किया गया। रामा ने कहा था कि वह युवाओं की चिंताओं को सुनने और उनके मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने इस पहल को स्वीकार नहीं किया। छात्रों और शिक्षकों ने कुर्सियों को हटाकर और उलटकर अपना विरोध जताया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के बातचीत के प्रस्ताव को नारे लगाकर खारिज किया। इसके बाद कुर्सियों और बातचीत के संदेश को लेकर यह घटना देश के राजनीतिक विवाद का अहम हिस्सा बन गई।

प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच बढ़ा टकराव

अल्बानिया में विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भी कई बार तनाव की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारी सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री रामा ने इस्तीफा देने से इनकार किया है। उनका कहना है कि सरकारें चुनाव के जरिए बदलती हैं। इस बीच, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की संभावनाएं भी विवाद का विषय बनी हुई हैं।

24 अक्टूबर को तिराना में हुए एक और बड़े सरकार-विरोधी प्रदर्शन के दौरान भी बातचीत के प्रतीक के रूप में रखे गए लाल कुशन में आग लगाए जाने की खबर सामने आई। इस तरह कुर्सियों और कुशन की घटनाएं आंदोलन में सरकार के संवाद प्रस्ताव के प्रति प्रदर्शनकारियों के विरोध का प्रतीक बन गईं।

फिलहाल अल्बानिया में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। छात्रों की मांगों, सरकार की प्रतिक्रिया और बातचीत की किसी संभावित पहल पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। यह घटना दिखाती है कि केवल बातचीत का प्रस्ताव रखना पर्याप्त नहीं होता; जब प्रदर्शनकारियों का सरकार पर भरोसा कमजोर हो, तो संवाद की पहल को स्वीकार कराना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।

नोट: अलग-अलग रिपोर्टों में कुर्सियां उलटने या फेंकने और बाद में लाल कुशन जलाने की घटनाओं का उल्लेख है। इसलिए सभी कुर्सियों को जलाए जाने का दावा स्पष्ट रूप से पुष्ट नहीं है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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