नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद डोला सेन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शीर्ष अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में ऑनलाइन फॉर्म-6 के साथ छेड़छाड़ किए जाने की बात स्वीकार की है। सेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि निर्वाचन आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता पंजीकरण के लिए संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी दी है। उन्होंने इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अदालत ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था। गुरुस्वामी ने कहा कि यदि अदालत इस मामले में नोटिस जारी करती है, तो इसे पहले से लंबित संबंधित याचिकाओं के समूह के साथ सुना जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने अपने जवाब में डोला सेन की याचिका में लगाए गए कई आरोपों को स्वीकार किया है।
सुनवाई के दौरान गुरुस्वामी ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग जिस तरह फॉर्म-6 में कथित बदलाव को उचित ठहराने की कोशिश कर रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि आयोग यह तर्क दे रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की अनुमति दी थी, लेकिन बिहार में इस्तेमाल किए गए संबंधित फॉर्म का उद्देश्य नागरिकता और जाति से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना था। उसका फॉर्म-6 से कोई संबंध नहीं था। गुरुस्वामी की यह टिप्पणी निर्वाचन आयोग की ओर से सोमवार को दाखिल किए गए हलफनामे के संदर्भ में आई।
निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में कहा था कि फॉर्म-6 में संशोधन करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। हालांकि, आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन के दौरान फॉर्म-6 के साथ दिए जाने वाले घोषणा-पत्र को जिस तरह प्रस्तुत किया गया, उससे यह आभास हो सकता था कि फॉर्म में संशोधन किया गया है। आयोग के अनुसार, ऑनलाइन प्रक्रिया को सरल बनाने और आवेदकों को केवल एक बार ओटीपी तथा ई-साइन की प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा देने के उद्देश्य से ऐसा किया गया था।
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने गुरुस्वामी की दलीलों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वह निर्वाचन आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और आयोग के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी किसी अन्य उद्देश्य से की जा रही है। अदालत में यह सुनवाई निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और देश के विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया लागू करने में कथित अनियमितताओं को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर हो रही थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं को निर्वाचन आयोग के जवाब पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। पीठ ने आदेश दिया कि मामले को 10 दिन बाद सूचीबद्ध किया जाए और तब तक प्रत्युत्तर दाखिल कर दिए जाएं। इससे पहले याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा था कि निर्वाचन आयोग ने अपना जवाब एक दिन पहले ही दाखिल किया है, इसलिए पक्षकारों को प्रत्युत्तर देने के लिए एक सप्ताह का समय मिलना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस अनुरोध से सहमति जताते हुए कहा कि प्रत्युत्तर दाखिल किए जाने चाहिए।
इन याचिकाओं में से एक याचिका राकेश कुमार सिंह ने दायर की है। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कथित तौर पर एकतरफा फैसले लेने के आरोप लगाते हुए उनके अधिकार और पद पर बने रहने को चुनौती देने के लिए ‘क्वो वारंटो’ रिट जारी करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, एसआईआर की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने भी याचिकाएं दाखिल की हैं। इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की याचिका भी शामिल है।
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पूरे मामले का संबंध निर्णय लेने की प्रक्रिया, संबंधित पक्षों से परामर्श और फैसलों पर सहमति बनने या मतभेद रहने जैसे पहलुओं से है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले से संबंधित फाइलों की टिप्पणियों और अन्य दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया की जांच की जा सके। इस मांग पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताते हुए इसे अनुचित अनुरोध बताया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत सभी पहलुओं से अवगत है और उचित समय पर इस संबंध में निर्णय लेगी।








