नई दिल्ली। टाटा संस के कार्यकारी अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन के पुनर्नियोजन को लेकर उठे विवाद के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर भारतीय व्यापारिक घरानों को अपनी कठपुतली की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि इस समय देश के उद्योगपति और व्यावसायिक दिग्गज डर के माहौल के कारण खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।
उन्होंने टाटा समूह में चल रहे विवाद का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि समूह को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और देश के व्यावसायिक नेतृत्व को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। राहुल गांधी ने आश्वासन दिया कि वे इन कथित गड़बड़ियों के खिलाफ न्याय सुनिश्चित कराएंगे।
राहुल गांधी के इस बयान पर तीखा पलटवार करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्षी नेता पर व्यावसायिक और कानूनी मामलों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। वित्त मंत्री ने कहा कि निजी कंपनियों के प्रशासनिक और कानूनी विषयों को बिना किसी आधार के आपराधिक करार देना पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने विपक्ष पर भारतीय उद्योग जगत और उद्यमियों के मनोबल को गिराने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
वित्त मंत्री ने अतीत की आर्थिक नीतियों का स्मरण कराते हुए कहा कि दशकों तक देश के उद्यमियों को लाइसेंस-कोटा राज के जाल में उलझाकर रखा गया, जबकि वर्तमान सरकार व्यापार को सुगम बनाने और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां अपना रही है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और देश के कानून सभी के लिए निष्पक्ष व्यवस्था प्रदान करते हैं, इसलिए हर विषय में राजनीति ढूंढने से बचना चाहिए।
यह पूरा राजनीतिक विवाद टाटा समूह के शीर्ष प्रबंधन में उत्पन्न आंतरिक असहमति के बाद सामने आया है। टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड द्वारा एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार संबंधी प्रस्ताव को प्रक्रियात्मक आधार पर चुनौती दी है।
कंपनी सचिव को भेजे पत्र में नोएल टाटा ने उल्लेख किया कि 17 सितंबर की बोर्ड बैठक के दौरान इस विषय को स्पष्ट कार्यसूची (एजेंडा) में शामिल किए बिना ही प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के नियमों और अनुच्छेदों के तहत आवश्यक चयन समिति की सिफारिशों तथा मनोनीत निदेशकों की सहमति के बिना यह निर्णय लिया गया, जो कि निर्धारित प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है।
इसके साथ ही नोएल टाटा ने बैठक की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, आधिकारिक मिनट्स और पारित प्रस्ताव की प्रमाणित प्रतियां अब तक उपलब्ध न कराए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि विवादित स्थिति और उनकी स्पष्ट असहमति के बावजूद प्रस्ताव को अंतिम मानकर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में दाखिल कर दिया गया। उन्होंने टाटा संस से इस मामले से संबंधित सभी औपचारिक दस्तावेज सात दिनों के भीतर साझा करने और बैठक के आधिकारिक रिकॉर्ड का पूरी तरह निपटारा होने तक इस प्रस्ताव पर आगे की किसी भी कार्यवाही को स्थगित रखने की मांग की है।








