टोक्यो। जापान में एक बार फिर शक्तिशाली भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया। सोमवार को आए 7.1 तीव्रता के भूकंप के तेज झटकों से कई इलाकों में धरती कांप उठी। भूकंप महसूस होते ही लोग अपने घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक इमारतों से बाहर निकल आए। कुछ सेकंड तक चले इन तेज झटकों ने लोगों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया।
जापान की मौसम और भूकंप निगरानी एजेंसियों के अनुसार, भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर था, लेकिन इसके झटके आसपास के कई शहरों तक महसूस किए गए। प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव एजेंसियों को अलर्ट पर रखा और संभावित नुकसान का आकलन शुरू कर दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कई स्थानों पर इमारतें हिलने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और यातायात प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
भूकंप के बाद लोगों से अपील की गई कि वे घबराएं नहीं और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। आपातकालीन सेवाओं की टीमें संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दी गई हैं, जबकि अस्पतालों और राहत केंद्रों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यह देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां पृथ्वी की कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं। इसी कारण यहां अक्सर छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं। जापान ने समय के साथ मजबूत भवन निर्माण मानकों, आधुनिक चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र को विकसित किया है, जिससे बड़े भूकंपों के दौरान जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स यानी बाद के झटके आने की संभावना बनी रहती है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की आवश्यकता है। राहत एवं बचाव दल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में स्थिति सामान्य करने के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें। पूरे देश में भूकंप के बाद हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।







