उत्तर प्रदेश में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने चिंता बढ़ा दी है। हालिया जांचों में अलग-अलग जगहों पर दूध और दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। हालांकि, पूरे उत्तर प्रदेश में रोजाना 20 हजार लीटर नकली दूध की सप्लाई होने के दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो पाई है। इसलिए इस आंकड़े को पुष्ट तथ्य के बजाय रिपोर्ट में किए गए दावे के रूप में देखना जरूरी है।
जांच में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट
अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आगरा में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जांचे गए 1,352 खाद्य नमूनों में 497 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट में दूध के नमूनों में पानी और सिंथेटिक दूध से जुड़ी गड़बड़ियों का भी उल्लेख किया गया है।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने अगस्त 2026 में एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, भंडारण और खुले में बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया था। सरकार ने बताया कि जांच के दौरान कुछ डेयरी उत्पादों में रिफाइंड तेल, अलग-अलग प्रकार के फैट और सोया उत्पादों जैसी सामग्री के इस्तेमाल के मामले सामने आए थे।
मिलावट के खिलाफ कार्रवाई तेज
उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य पदार्थों की जांच और छापेमारी बढ़ाई है। विभाग के मुताबिक, पिछले नौ वर्षों में 2.10 लाख से अधिक छापेमारी की गई और 2.64 लाख से ज्यादा खाद्य नमूने लिए गए। इनमें बड़ी संख्या में नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए और कई मामलों में कानूनी कार्रवाई भी हुई।
आंकड़ों के मुताबिक, कुछ नमूने ऐसे भी पाए गए जिन्हें विभाग ने असुरक्षित माना, जबकि अन्य नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे या लेबलिंग से जुड़े नियमों का उल्लंघन करते पाए गए।
नकली दूध को लेकर पहले भी सामने आए मामले
उत्तर प्रदेश में नकली दूध तैयार करने और उसकी सप्लाई से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। जुलाई 2024 में बुलंदशहर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने नकली दूध तैयार करने वाले एक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की थी। रिपोर्ट के अनुसार, तैयार किए गए दूध की दिल्ली-NCR तक सप्लाई की जा रही थी।
इन घटनाओं से यह साफ है कि दूध और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने चुनौती बनी हुई है। इसी वजह से नमूनों की जांच, छापेमारी और नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों जरूरी है सतर्कता?
दूध रोजाना इस्तेमाल होने वाला खाद्य पदार्थ है, इसलिए उसकी गुणवत्ता सीधे उपभोक्ताओं की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी है। बाजार में किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर उपभोक्ताओं को बिना पुष्टि के सोशल मीडिया पर चल रहे दावों पर भरोसा करने के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के माध्यम से शिकायत या जांच की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
फिलहाल 20 हजार लीटर प्रतिदिन नकली दूध की सप्लाई वाला आंकड़ा पुष्ट आधिकारिक आंकड़े के तौर पर सामने नहीं आया है। लेकिन उत्तर प्रदेश में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट के मामलों को लेकर सरकारी जांच और कार्रवाई जारी है।








