नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद बर्खास्त किए गए कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने विश्वविद्यालय द्वारा ली गई बर्खास्तगी की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी की पीठ ने सांसद द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इस मामले में अदालत अब अगली सुनवाई आगामी जनवरी माह में करेगी।
इनर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम राजनीति में आने से पहले जेएनयू के ‘स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज’ में बतौर प्रोफेसर कार्यरत थे। मई माह में विश्वविद्यालय की लगभग 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि वे बैठकों या कार्यक्रमों के बहाने छात्राओं को अपने कैंपस स्थित आवास पर बुलाकर अनुचित व्यवहार करते थे तथा कक्षाओं के दौरान भी अश्लील टिप्पणियां करते थे। विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की जांच रिपोर्ट के आधार पर 9 अक्टूबर को जेएनयू की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के आदेश से उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
दूसरी ओर, सांसद बिमोल अकोइजम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इस घटनाक्रम ने मणिपुर में बड़ा सियासी रूप ले लिया है, जहां भारतीय जनता पार्टी और महिला विंग द्वारा लगातार उनके लोकसभा सदस्यता से इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं।








