लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनप्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है और इस विश्वास को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि जनता से जुड़े हर महत्वपूर्ण मुद्दे को सदन में पूरी गंभीरता के साथ उठाया जाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा और विधान परिषद जैसे लोकतांत्रिक मंच जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने रखने के सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि का पहला दायित्व अपने क्षेत्र की समस्याओं, विकास कार्यों और जनहित से जुड़े मुद्दों को सदन तक पहुंचाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन में होने वाली चर्चा रचनात्मक, तथ्यात्मक और समाधान आधारित होनी चाहिए, ताकि जनता के हित में ठोस निर्णय लिए जा सकें।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर नागरिक तक विकास का लाभ पहुंचाना है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, कानून-व्यवस्था, आधारभूत संरचना और सामाजिक कल्याण जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा से बेहतर नीतियां बनाई जा सकती हैं और जनता की समस्याओं का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की अपनी-अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्वस्थ बहस, सकारात्मक सुझाव और रचनात्मक आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रदेश और जनता के व्यापक हित को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में लोगों की समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को जिम्मेदारी के साथ सदन तक पहुंचाना उनकी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। इससे न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि शासन व्यवस्था भी अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि सभी जनप्रतिनिधि जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपनी भूमिका निभाएंगे, तो प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी और आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।








