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August 26, 2026 11:22 am

एक लाख में मिला कैंसर का इंजेक्शन… अंदर था सिर्फ पानी, कालाबाजारियों का खेल बेनकाब

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच ने कैंसर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक खौफनाक कालाबाजारी रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है। मरीज और उनके परिवार दिल्ली के ब्लैक मार्केट में करीब एक-एक लाख रुपये देकर एवालुमैब (बावेन्सियो) इंजेक्शन खरीद रहे थे, लेकिन जर्मनी की लैब रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इन वायलों में कैंसर से लड़ने वाला मूल सक्रिय तत्व लगभग शून्य था। असल में इनमें सिर्फ पानी और जानलेवा बैक्टीरिया भरे मिले।

क्राइम ब्रांच के अनुसार, 20 अगस्त को 7 राज्यों में फैले करीब 9 करोड़ रुपये के इस रैकेट का भंडाफोड़ किया गया। मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने 588 भरे हुए एंटी-कैंसर वायल, 6 खाली वायल, 7 खाली दवा के बॉक्स, अन्य दवाओं की 3,021 यूनिट और करीब 50 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। जब्त दवाओं में डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइवो, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी कैंसर दवाएं शामिल हैं।

जर्मनी की लैब ने खोला राज

दवा बनाने वाली कंपनी के जरिए जर्मनी की मर्क लैब से कराई गई जांच में साफ सामने आया कि जब्त सैंपल (बैच नंबर AU052510) में एक्टिव इंग्रीडिएंट (20 mg/mL) नगण्य था। असली दवा में मैनिटोल 8.2 प्रतिशत और एसिटिक एसिड 0.092 प्रतिशत होता है, जबकि नकली वायलों में ये स्तर मात्र 1.3 प्रतिशत और 0.013 प्रतिशत पाए गए। रबर स्टॉपर में 1.2 मिमी का छेद और एल्युमीनियम कैप पर खरोंचें भी मिलीं, जो साफ बताती हैं कि वायलों को छेड़ा गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, गिरोह असली इंजेक्शन से सीरिंज के जरिए दवा निकाल लेता था और खाली शीशियों में पानी के साथ अन्य बैक्टीरिया (जिसमें ई-कोलाई जैसे घातक संक्रमण फैलाने वाले तत्व शामिल) मिलाकर दोबारा सील कर देता था। ये नकली वायल फिर ब्लैक मार्केट में असली की तरह बेचे जा रहे थे।

कैसे चलता था पूरा खेल?

पुलिस जांच में सामने आया कि दवाएं तीन मुख्य रास्तों से सिंडिकेट तक पहुंचती थीं:

  • गैरकानूनी स्रोतों से नकली दवाओं की खरीद
  • अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए रखी दवाओं की हेराफेरी या चोरी
  • सरकारी संस्थानों और गोदामों से सरकारी सप्लाई की दवाओं का डायवर्जन

गिरोह असली कार्टन और खाली बॉक्स संभालकर रखता था। बैच नंबर, एमआरपी और अन्य पहचान चिह्न एसीटोन जैसे रसायनों से मिटा दिए जाते थे। फिर थर्मोकोल बॉक्स, बबल रोल, टेप और पॉलीथीन से नई पैकिंग तैयार की जाती थी। बिना किसी वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड या ड्रग लाइसेंस के ये दवाएं घरों और ठिकानों पर रखी जातीं और बिचौलियों के जरिए आगे सप्लाई की जातीं।

राजस्थान की सरकारी सप्लाई भी शामिल

सबसे गंभीर पहलू यह है कि राजस्थान सरकार की मुफ्त दवा योजना के तहत कैंसर मरीजों के लिए सप्लाई की गई दवाएं भी इस रैकेट में शामिल पाई गईं। बीकानेर के आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीबीएम हॉस्पिटल) को आरएमएससीएल से भेजे गए बावेन्सियो इंजेक्शन दिल्ली के ब्लैक मार्केट में बरामद हुए। इनमें से कुछ वायल सीधे सरकारी सप्लाई से जुड़े बैच के थे।

आरएमएससीएल ने बीकानेर, जयपुर, जोधपुर और उदयपुर मेडिकल कॉलेजों की जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और कई कमेटियां गठित कर सप्लाई चेन, वितरण रिकॉर्ड और मरीजों के इलाज के आंकड़ों की जांच चल रही है। कुछ मामलों में कागजों पर एक महिला मरीज को 56 वायल लगाए जाने जैसे संदिग्ध रिकॉर्ड भी सामने आए हैं।

नेटवर्क कितना बड़ा था?

यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों तक फैला था। नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, झज्जर, फरीदाबाद जैसे जगहों से भी आरोपी पकड़े गए। एक आरोपी के पास अकेले 337 एंटी-कैंसर वायल मिले, तो दूसरे के पास 108 वायल और नकदी। गिरफ्तार आरोपियों में लक्ष्मी नगर के अभिषेक वैश्य, शुभम कुमार चौधरी और सूरज चौधरी समेत कई नाम शामिल हैं।

22 जून को मिली गुप्त सूचना के बाद जांच शुरू हुई। पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में संदिग्ध ठिकाने चिन्हित किए गए। 11 जुलाई को ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ सात टीमों ने एक साथ छापेमारी की। 12 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई और आगे की कार्रवाई में 17 आरोपी गिरफ्तार हुए।

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परिवार लाखों रुपये खर्च कर इन नकली इंजेक्शनों पर भरोसा कर रहे थे। असली इलाज न मिलने से न सिर्फ बीमारी बढ़ रही थी, बल्कि पानी और बैक्टीरिया भरे इंजेक्शन से संक्रमण का खतरा भी बना हुआ था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ पैसों का खेल नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से खिलवाड़ है।

क्राइम ब्रांच अब पूरे सप्लाई चेन, पैसे के लेनदेन और इसमें शामिल अस्पताल कर्मचारियों या बिचौलियों की भूमिका की गहरी जांच कर रही है। राजस्थान सरकार ने भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस पूरे मामले ने सरकारी अस्पतालों में महंगी जीवनरक्षक दवाओं की निगरानी और वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच अभी जारी है और पुलिस को और गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है। कैंसर मरीजों के परिजनों से अपील की गई है कि वे सिर्फ विश्वसनीय स्रोतों और डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं लें।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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