मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि ईरान ने अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमान को चीनी तकनीक वाली मिसाइल से मार गिराया हो सकता है। इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है और अमेरिका, ईरान तथा चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक तनाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल 2026 में दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी F-15E Strike Eagle को एक शोल्डर-फायर्ड यानी कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल ने निशाना बनाया था। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि यह मिसाइल चीन में निर्मित MANPADS (Man Portable Air Defense System) हो सकती है। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस दावे की पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।
बताया जा रहा है कि विमान के गिरने के बाद अमेरिकी सेना को अपने दोनों पायलटों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। यह मिशन अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे जटिल बचाव अभियानों में से एक माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस ऑपरेशन में दर्जनों विमान और सैकड़ों सैनिक शामिल किए गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वास्तव में चीनी निर्मित मिसाइल का इस्तेमाल हुआ है, तो यह केवल एक सैन्य घटना नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन के लिए भी बड़ा संकेत हो सकता है। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि चीन ने ईरान को केवल मिसाइल ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी की रडार तकनीक और अन्य निगरानी उपकरण भी उपलब्ध कराए हो सकते हैं, जिससे ईरान को अमेरिकी लड़ाकू विमानों की गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिली।
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार F-15E Strike Eagle दुनिया के सबसे शक्तिशाली और भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। ऐसे विमान का युद्ध क्षेत्र में गिराया जाना अमेरिकी वायु शक्ति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि आधुनिक युद्ध में छोटे लेकिन उन्नत मिसाइल सिस्टम भी महंगे और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
इस बीच चीन ने किसी भी प्रत्यक्ष सैन्य सहायता के आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं अमेरिकी जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित मिसाइल ईरान तक कैसे पहुंची और क्या इसके पीछे किसी तीसरे देश की भूमिका रही है।
मिडिल ईस्ट में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल के बीच यह खुलासा आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और चीन के रिश्तों को और अधिक जटिल बना सकता है। हालांकि अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक यह दावा पूरी तरह प्रमाणित नहीं माना जा सकता, लेकिन इस खबर ने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों और सैन्य विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर जरूर खींच लिया है।
फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिकी जांच पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्या वास्तव में ईरान ने चीनी मिसाइल की मदद से अमेरिका के शक्तिशाली F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराया था या इसके पीछे कोई और वजह थी।







