डिजिटल हेल्थ और फिटनेस के बढ़ते दौर में हेल्थ एप्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। कदम गिनने से लेकर हार्ट रेट, नींद, कैलोरी और ब्लड प्रेशर तक की जानकारी अब मोबाइल ऐप्स के जरिए आसानी से मिल जाती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन ऐप्स पर पूरी तरह भरोसा करना कई बार गलत और खतरनाक साबित हो सकता है।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, हेल्थ एप्स द्वारा दिए गए डेटा कई बार अनुमान (estimation) पर आधारित होते हैं, न कि पूरी तरह मेडिकल जांच पर। ऐसे में इन्हें अंतिम सच मानकर कोई भी स्वास्थ्य निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि हेल्थ ऐप्स केवल एक “सपोर्ट टूल” हैं, न कि मेडिकल डायग्नोसिस का विकल्प। इसलिए इनका उपयोग सावधानी के साथ करना जरूरी है।
हेल्थ एप्स का इस्तेमाल करते समय 12 जरूरी सावधानियां:
- किसी भी हेल्थ ऐप के डेटा को मेडिकल रिपोर्ट का विकल्प न मानें
- गंभीर लक्षण होने पर केवल ऐप पर निर्भर न रहें, डॉक्टर से संपर्क करें
- बिना प्रमाणित ऐप्स को डाउनलोड न करें
- ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी जरूर पढ़ें
- अपनी पर्सनल हेल्थ डेटा शेयर करते समय सावधानी रखें
- हर ऐप की रीडिंग को सही न मानें, क्रॉस-चेक करें
- लगातार बदलते डेटा को देखकर घबराएं नहीं
- हार्ट रेट या BP जैसी रीडिंग्स को केवल रेफरेंस मानें
- अनजान या फ्री ऐप्स में डेटा लीक का खतरा समझें
- किसी भी ऐप पर इलाज शुरू न करें
- ऐप को नियमित अपडेट करते रहें
- जरूरत पड़ने पर केवल प्रमाणित मेडिकल डिवाइस का उपयोग करें
विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्थ एप्स फिटनेस ट्रैकिंग के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इन्हें कभी भी डॉक्टर की सलाह या मेडिकल जांच का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
आज के समय में जब हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग हो रहा है, ऐसे में सही जानकारी और सावधानी बेहद जरूरी है। गलत डेटा पर भरोसा करने से मानसिक तनाव और गलत निर्णय दोनों का खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल विशेषज्ञ लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि तकनीक का उपयोग समझदारी के साथ करें और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में हमेशा प्रमाणित मेडिकल सलाह को प्राथमिकता दें।








