भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले कुछ समय से लगातार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने और भारत आने के बाद दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए। अब बांग्लादेश की नई सरकार भारत के साथ रिश्तों को अपने राष्ट्रीय हित और समानता के आधार पर आगे बढ़ाने की बात कर रही है। इसी बीच चीन के साथ ढाका की बढ़ती नजदीकी ने क्षेत्रीय समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
शेख हसीना बनीं सबसे बड़ा विवादित मुद्दा
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में शेख हसीना का मुद्दा सबसे अहम अड़चन बना हुआ है। हसीना फिलहाल भारत में हैं और बांग्लादेश की मौजूदा सरकार लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। ढाका का आरोप है कि भारत की जमीन से हसीना की राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर रही हैं। हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने भारत में हसीना के मीडिया से बातचीत करने पर भी आपत्ति जताई।
वहीं, भारत ने बांग्लादेश की प्रत्यर्पण संबंधी मांग की समीक्षा कानूनी प्रक्रियाओं के तहत करने की बात कही है। इस मुद्दे ने दोनों देशों के बीच संभावित उच्चस्तरीय मुलाकात और रिश्तों में सुधार की कोशिशों को भी प्रभावित किया है।
चीन से बढ़ती नजदीकी पर भी नजर
दूसरी तरफ बांग्लादेश और चीन के संबंधों में तेजी से विस्तार देखने को मिला है। जून 2026 में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग के अलावा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, रणनीतिक साझेदारी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए। बांग्लादेश ने इसे दोनों देशों के संबंधों के नए दौर के तौर पर पेश किया।
हालांकि, बांग्लादेश का कहना है कि चीन के साथ बेहतर संबंधों का मतलब भारत के साथ रिश्ते खराब करना नहीं है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की ओर से भी यह संकेत दिया गया है कि ढाका सभी देशों के साथ संतुलित और रचनात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है।
भारत से रिश्ते सुधारने की भी कोशिश
तनाव के बावजूद ढाका की ओर से भारत के साथ संवाद जारी रखने के संकेत मिलते रहे हैं। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री ने हाल में कहा कि भारत के साथ अच्छा कामकाजी संबंध बनाए रखना जरूरी है। दोनों देशों के बीच मतभेदों को बातचीत के जरिए संभालने पर जोर दिया गया है।
इस बीच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर भी चर्चा हुई, लेकिन दोनों देशों के बीच बने तनाव के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। विश्लेषकों के मुताबिक, शेख हसीना का मुद्दा इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आगे क्या होगा?
भारत के लिए बांग्लादेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश लंबी सीमा साझा करते हैं और व्यापार, सुरक्षा, कनेक्टिविटी तथा पूर्वोत्तर भारत से जुड़े कई रणनीतिक हित दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब रखते हैं। ऐसे में ढाका का चीन के साथ बढ़ता सहयोग और भारत के साथ शेख हसीना को लेकर जारी विवाद नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती है।
हालांकि, मौजूदा स्थिति को केवल चीन या शेख हसीना में से किसी एक वजह से जोड़ना सही नहीं होगा। बांग्लादेश की घरेलू राजनीति, भारत के साथ लंबित मुद्दे और उसकी बहु-दिशात्मक विदेश नीति—इन सभी का असर रिश्तों पर पड़ रहा है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीतिक संपर्क जारी है, इसलिए आने वाले समय में रिश्तों का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि विवादित मुद्दों को किस तरह सुलझाया जाता है।








