आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता तनाव और असंतुलित खानपान लोगों को कई गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं। इन्हीं में से एक है एट्रियल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation या AFib), जो दिल की धड़कन से जुड़ी एक गंभीर समस्या है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी के कारण लाखों लोग समय पर इसका पता नहीं लगा पाते। यदि इसका इलाज समय रहते न किया जाए, तो यह स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर और अन्य गंभीर हृदय संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकती है।
Atrial Fibrillation में दिल के ऊपरी हिस्से (एट्रिया) की धड़कन सामान्य और नियमित रहने के बजाय बहुत तेज और अनियमित हो जाती है। इससे शरीर के विभिन्न अंगों तक रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। कई मामलों में दिल के अंदर खून के थक्के बनने लगते हैं, जो मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर इसे हल्के में न लेने की सलाह देते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में दिल की धड़कन का तेज या अनियमित महसूस होना, सांस फूलना, सीने में बेचैनी, अत्यधिक थकान, चक्कर आना और कमजोरी शामिल हैं। हालांकि, कुछ लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते और बीमारी का पता केवल नियमित स्वास्थ्य जांच या ईसीजी (ECG) के दौरान चलता है। ऐसे मामलों में खतरा और भी बढ़ जाता है क्योंकि मरीज को लंबे समय तक अपनी स्थिति का पता ही नहीं चलता।
डॉक्टर बताते हैं कि बढ़ती उम्र, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, थायरॉयड की समस्या, अत्यधिक शराब का सेवन, धूम्रपान और तनाव इस बीमारी के प्रमुख जोखिम कारक हैं। जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी समस्या है या जिनके परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
Atrial Fibrillation का निदान ईसीजी, होल्टर मॉनिटरिंग, इकोकार्डियोग्राफी और अन्य हृदय संबंधी जांचों के माध्यम से किया जाता है। समय पर जांच और उचित उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवाइयों, रक्त को पतला करने वाली दवाओं (ब्लड थिनर्स), हार्ट रिद्म कंट्रोल थेरेपी या जरूरत पड़ने पर कैथेटर एब्लेशन जैसी आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की सलाह दे सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना, पर्याप्त नींद लेना तथा तनाव कम करना हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि दिल की धड़कन में किसी भी तरह की अनियमितता महसूस हो या ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए हृदय रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।








