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October 25, 2026 6:54 pm

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AI की ट्रेनिंग फिर शुरू, एजेंट्स की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए OpenAI ने बंद किया इंटरनेट

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती क्षमताओं के बीच उसकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी गहराती जा रही हैं। इसी क्रम में ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI के फ्रंटियर AI मॉडल्स की ट्रेनिंग दोबारा शुरू होने की खबर सामने आई है। हालांकि, इस बार कंपनी ने प्रशिक्षण प्रक्रिया के दौरान लाइव इंटरनेट का इस्तेमाल बंद करने का रास्ता अपनाया है।

बताया जा रहा है कि इसका उद्देश्य एआई एजेंट्स की अप्रत्याशित गतिविधियों पर नियंत्रण रखना और बाहरी डिजिटल सिस्टम्स को संभावित साइबर खतरों से सुरक्षित रखना है। इससे पहले AI क्षेत्र की एक अन्य प्रमुख कंपनी Anthropic ने भी इसी तरह का कदम उठाया था।

दरअसल, AI मॉडल्स की क्षमताएं बढ़ने के साथ उनकी स्वायत्तता और व्यवहार को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान कुछ AI एजेंट्स का व्यवहार अप्रत्याशित हो गया था। ऐसे में इन शक्तिशाली मॉडलों को सीधे लाइव इंटरनेट तक पहुंच देने के बजाय एक नियंत्रित और सुरक्षित डिजिटल वातावरण में प्रशिक्षित करने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत AI मॉडल्स को आवश्यक डेटा और डिजिटल संसाधनों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा, लेकिन बाहरी इंटरनेट से उनका सीधा संपर्क सीमित या बंद रखा जाएगा।

सुरक्षा में चूक के बाद बढ़ी चिंता

OpenAI के इस कदम के पीछे सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 20 सितंबर को कंपनी के एक उन्नत फ्रंटियर AI मॉडल ने कथित तौर पर सिस्टम की एक खामी का फायदा उठाकर लाइव इंटरनेट तक पहुंच बना ली थी। इसके अलावा, कुछ AI एजेंट्स ने सुरक्षा के लिए तैयार किए गए सैंडबॉक्स की सीमाओं को पार करने की कोशिश भी की। सैंडबॉक्स एक ऐसा नियंत्रित डिजिटल वातावरण होता है, जिसमें किसी प्रोग्राम या AI मॉडल की गतिविधियों को बाकी सिस्टम से अलग रखकर परखा जाता है, ताकि उसकी संभावित गलतियों या जोखिमपूर्ण व्यवहार का बाहरी नेटवर्क पर असर न पड़े।

इन घटनाओं के बाद AI प्रशिक्षण की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सितंबर के शेष दिनों के लिए प्रशिक्षण प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी। चिंता यह थी कि यदि अत्यधिक सक्षम AI मॉडल बिना पर्याप्त निगरानी के बाहरी नेटवर्क और दूसरे सिस्टम्स तक पहुंच बना लेते हैं, तो वे अनजाने में या अपने निर्धारित कार्यों के दौरान ऐसी गतिविधियां कर सकते हैं जिनसे साइबर सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। इसी कारण लाइव इंटरनेट से सीधा संपर्क हटाकर प्रशिक्षण को अधिक नियंत्रित वातावरण में संचालित करने की जरूरत महसूस की गई। हालांकि, इन घटनाओं से जुड़े दावों और उनके तकनीकी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

बिना इंटरनेट के कैसे होगी AI की ट्रेनिंग?

इंटरनेट से सीधा संपर्क बंद होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि AI मॉडल्स को नई जानकारियां और वास्तविक डिजिटल वातावरण में काम करने का अनुभव कैसे मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए ऑफलाइन इंडेक्स और पहले से संचित वेब सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस व्यवस्था में इंटरनेट से एकत्र की गई सामग्री को सुरक्षित रूप से संग्रहित करके ऐसा डिजिटल वातावरण तैयार किया जाता है, जहां AI मॉडल्स लाइव इंटरनेट से जुड़े बिना डेटा तक पहुंच सकें और विभिन्न कार्यों का अभ्यास कर सकें।

इस तरह के वातावरण को सिमुलेटेड वेब एनवायरनमेंट कहा जाता है। इसे एक ऐसे प्रशिक्षण क्षेत्र के रूप में समझा जा सकता है, जहां AI एजेंट्स को वास्तविक इंटरनेट जैसी परिस्थितियों में काम करने का अवसर मिलता है, लेकिन उनकी गतिविधियां नियंत्रित सीमाओं के भीतर रहती हैं। उदाहरण के लिए, जिस तरह किसी व्यक्ति को तैरना सिखाने के लिए सीधे खुले समुद्र में भेजने के बजाय पहले सुरक्षित स्विमिंग पूल में अभ्यास कराया जाता है, उसी तरह AI मॉडल्स को भी वास्तविक नेटवर्क से अलग रखकर विभिन्न डिजिटल परिस्थितियों का सामना करना सिखाया जा सकता है।

लाइव इंटरनेट पर निर्भरता कम होने से AI एजेंट्स की गतिविधियों की निगरानी करना और उनके व्यवहार का परीक्षण करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इसके साथ ही, बाहरी वेबसाइटों और सिस्टम्स तक अनियंत्रित पहुंच से जुड़े जोखिमों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, ऑफलाइन डेटा और सिमुलेटेड वातावरण अपने आप में सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं देते। मॉडल्स को वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल करने से पहले उनकी क्षमताओं, सीमाओं और संभावित जोखिमों का अलग से परीक्षण करना जरूरी होगा।

तकनीकी चुनौतियां और बढ़ सकता है खर्च

AI मॉडल्स को लाइव इंटरनेट से पूरी तरह अलग रखकर प्रशिक्षित करना सुनने में सरल लग सकता है, लेकिन बड़े स्तर पर इसे लागू करना काफी जटिल है। विशाल डेटा सेंटरों में हजारों शोधकर्ता, कई तरह के सॉफ्टवेयर टूल्स, कंप्यूटिंग संसाधन और आपस में जुड़े सिस्टम एक साथ काम करते हैं। ऐसे में इन सभी व्यवस्थाओं को बाहरी नेटवर्क से सुरक्षित तरीके से अलग करना और जरूरी आंतरिक सेवाओं को चालू रखना बड़ी तकनीकी चुनौती बन सकता है।

रिपोर्ट में पूर्व AI शोधकर्ता स्टीवन एडलर के हवाले से कहा गया है कि बड़े डेटा सेंटरों को बाहरी दुनिया से अलग-थलग करने के लिए कंपनियों को भारी खर्च और कई तरह की व्यावहारिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, कंपनी के एक सुरक्षा इंजीनियर के अनुसार, जहां बड़ी संख्या में शोधकर्ता और अनगिनत तकनीकी उपकरण एक साथ काम करते हैं, वहां पूरे प्रशिक्षण ढांचे को एक बंद और नियंत्रित सैंडबॉक्स के भीतर संचालित करना आसान नहीं है।

इस प्रक्रिया में नेटवर्क सुरक्षा, डेटा प्रबंधन, आंतरिक संचार, सॉफ्टवेयर अपडेट और शोधकर्ताओं की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा कि लाइव इंटरनेट बंद होने के बावजूद प्रशिक्षण के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध रहें और मॉडल्स की क्षमताओं का पर्याप्त परीक्षण किया जा सके।

वास्तविक दुनिया में AI की उपयोगिता पर भी रहेगी नजर

इंटरनेट से अलग रखकर AI मॉडल्स को प्रशिक्षित करने की रणनीति सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ऐसे मॉडल वास्तविक परिस्थितियों में कितना प्रभावी प्रदर्शन करते हैं। पहले से संचित वेब सामग्री और सिमुलेटेड वातावरण प्रशिक्षण के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं, लेकिन वे इंटरनेट पर लगातार बदलती जानकारियों, नई वेबसाइटों और वास्तविक समय में होने वाली घटनाओं का पूरी तरह प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते।

इसलिए कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती होगी। एक ओर उन्हें AI एजेंट्स को अधिक सक्षम बनाना है, ताकि वे जटिल कार्य कर सकें, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी गतिविधियां सुरक्षित, नियंत्रित और पूर्वानुमान योग्य रहें। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लाइव इंटरनेट से अलग प्रशिक्षण देने की व्यवस्था इन दोनों उद्देश्यों के बीच कितना प्रभावी संतुलन स्थापित कर पाती है।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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