समान नागरिक संहिता (समान नागरिक संहिता (UCC)) को लेकर आयोजित एक अहम बैठक में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। इस बैठक से कांग्रेस सहित कुल चार विपक्षी दलों ने दूरी बना ली, जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा UCC से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा और सुझाव लेने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। इसमें कानून के संभावित ढांचे, सामाजिक प्रभाव और क्रियान्वयन की चुनौतियों पर विचार-विमर्श होना था। हालांकि, कई प्रमुख विपक्षी दलों की गैरमौजूदगी ने बैठक की राजनीतिक अहमियत को और बढ़ा दिया।
बैठक में शामिल न होने वाले दलों में प्रमुख रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित चार पार्टियां शामिल रहीं। इन दलों ने अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए बैठक से दूरी बनाई, जबकि कुछ ने इसे एकतरफा प्रक्रिया बताया।
वहीं, वामपंथी दल सीपीएम ने बैठक में प्रस्तावित कुछ बिंदुओं पर कड़ा विरोध जताया। पार्टी का कहना है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक सहमति और सभी हितधारकों की भागीदारी जरूरी है, न कि सीमित विचार-विमर्श के आधार पर निर्णय।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सरकार की ओर से UCC के संभावित प्रारूप और इसके लागू होने पर होने वाले सामाजिक व कानूनी प्रभावों पर चर्चा की गई। साथ ही विभिन्न राज्यों के दृष्टिकोण और नागरिक अधिकारों से जुड़े पहलुओं को भी सामने रखा गया।
विपक्षी दलों की अनुपस्थिति के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है। सरकार समर्थकों का कहना है कि यह प्रक्रिया एक सुधारात्मक कदम है, जिसका उद्देश्य देश में समान कानून व्यवस्था को मजबूत करना है। वहीं विपक्ष इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम बता रहा है।
फिलहाल, इस मुद्दे पर देशभर में बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में UCC को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।








