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November 4, 2026 8:21 pm

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केंद्र सरकार ने बढ़ाई स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 की अवधि, बजट में 7,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने की उम्मीद

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण स्वच्छता को बढ़ावा देने वाली अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II’ की अवधि को मार्च 2028 तक के लिए बढ़ा दिया है। इस विस्तार के साथ ही सरकार आगामी केंद्रीय बजट 2027-28 में इस प्रमुख योजना के लिए लगभग 7,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की तैयारी में है। जल शक्ति मंत्रालय के अधीन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा वित्त मंत्रालय से योजना की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, जिसे आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के सभी शेष गांव मार्च 2028 के अंत तक निर्धारित वित्तीय परिव्यय के भीतर ही आवश्यक ‘ओडीएफ प्लस’ का दर्जा हासिल कर लें। प्रशासनिक परिभाषा के अनुसार, ‘ओडीएफ प्लस’ गांव वह कहलाता है जो न केवल अपने खुले में शौच मुक्त स्थिति को निरंतर बनाए रखता है, बल्कि जहां ठोस और तरल कचरा प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था मौजूद हो और जो दृश्य रूप से भी पूरी तरह स्वच्छ नजर आए। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2028 के बाद इस योजना के लिए और कोई समय सीमा विस्तार नहीं दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19 फरवरी 2020 को इस योजना के दूसरे चरण को मंजूरी दी थी। शुरुआत में इसे वित्त वर्ष 2024-25 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में 15वें वित्त आयोग की अवधि यानी मार्च 2027 तक के लिए बढ़ाया गया था और अब इसे एक साल और आगे बढ़ा दिया गया है। योजना के आधिकारिक डैशबोर्ड पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल 5.86 लाख गांवों में से अब तक 5.70 लाख गांवों को सफलतापूर्व ‘ओडीएफ प्लस’ घोषित किया जा चुका है।

वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 1,40,881 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय को स्वीकृति दी थी, जिसमें से 52,497 करोड़ रुपये सीधे पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बजट से उपलब्ध कराए जाने थे। शेष राशि का प्रबंध 15वें वित्त आयोग, मनरेगा (MGNREGS) और ठोस व तरल कचरा प्रबंधन से प्राप्त होने वाले राजस्व मॉडल के फंड से किया जाना तय हुआ था। वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक के छह वर्षों में विभाग के बजट से 28,726 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 7,192 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। योजना के वित्तीय ढांचे के तहत पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और जम्मू-कश्मीर के लिए केंद्र और राज्यों का अंशदान 90:10 के अनुपात में है, अन्य राज्यों के लिए 60:40 तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए शत-प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाती है।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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