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November 4, 2026 8:01 pm

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मुंह में ठूंस दिए पत्थर, फिर जिंदा गड्ढे में दफनाया… जम्मू-कश्मीर पुलिस के एसपीओ की खौफनाक हत्या, जमीन विवाद में चचेरे भाई और बेटे पर आरोप

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले से एक दिल दहला देने वाली हत्या का मामला सामने आया है। यहां एक 55 वर्षीय विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) की कथित तौर पर बेहद बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि जमीन को लेकर पुराने विवाद के चलते उनके ही चचेरे भाई और उसके बेटे ने पहले उनके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया, फिर मुंह में पत्थर और मिट्टी भरकर उन्हें जिंदा ही गड्ढे में दफना दिया। पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में हत्या की वजह जमीन से जुड़ा पुराना पारिवारिक विवाद सामने आया है, जिसे दोनों परिवारों के बीच पहले ही सुलझा लिया गया था। इसके बावजूद इस विवाद का इतना भयावह अंत होगा, इसकी कल्पना मृतक के परिजनों ने कभी नहीं की थी।

मृतक की पहचान 55 वर्षीय बशीर अहमद के रूप में हुई है, जो जम्मू-कश्मीर पुलिस में विशेष पुलिस अधिकारी के तौर पर तैनात थे। वह किश्तवाड़ जिले के आतंकवाद प्रभावित इलाके त्रिगाम गांव में अपने परिवार के साथ रहते थे। 14 अक्टूबर की शाम बशीर अहमद रोजाना की तरह अपनी सर्विस राइफल लेकर घर से ड्यूटी के लिए निकले थे। उनकी तैनाती घर से करीब 800 मीटर दूर जंगल के इलाके में थी। उन्हें रातभर की लगभग 12 घंटे की ड्यूटी करनी थी और उनकी सामान्य दिनचर्या के मुताबिक वह अगली सुबह छह से साढ़े छह बजे के बीच घर लौट आते थे। लेकिन 15 अक्टूबर की सुबह जब काफी समय बीत जाने के बाद भी वह घर नहीं पहुंचे तो परिवार की चिंता बढ़ने लगी।

बशीर अहमद की पत्नी परवीना, जिनकी उम्र 50 वर्ष है, और 15 वर्षीय बेटी दिलशादा सुबह से ही उनके लौटने का इंतजार कर रही थीं। सुबह करीब साढ़े आठ बजे तक जब उनका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने पास में रहने वाले उनके चचेरे भाई गुलाम रसूल से संपर्क किया। इसके बाद परिवार के लोग सीधे उस स्थान पर पहुंचे जहां बशीर अहमद की ड्यूटी लगी हुई थी। वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने बताया कि बशीर सुबह करीब साढ़े छह बजे ही अपनी ड्यूटी खत्म करके घर के लिए निकल चुके थे। घर और ड्यूटी स्थल के बीच की दूरी महज 15 मिनट पैदल चलने की थी, लेकिन इसके बावजूद वह घर नहीं पहुंचे थे।

परिजनों ने पहले आसपास के जंगलों में उनकी तलाश शुरू की। उन्हें आशंका थी कि जंगल के रास्ते में किसी जंगली जानवर ने उन पर हमला न कर दिया हो। काफी खोजबीन के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली तो परिवार किश्तवाड़ पुलिस थाने पहुंचा और उनके लापता होने की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा बलों की अलग-अलग टीमें इलाके में तलाश के लिए रवाना कर दी गईं। शुरुआती जांच में पुलिस को यह मामला आतंकवादियों द्वारा अपहरण किए जाने का लग रहा था, क्योंकि बशीर अहमद अपनी सर्विस राइफल के साथ लापता हुए थे।

मोबाइल फोन की लोकेशन से मिला अहम सुराग

किश्तवाड़ पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी फिरदौस अहमद के मुताबिक, 15 अक्टूबर की रात तक तलाश अभियान चलाने के बावजूद पुलिस को बशीर अहमद का कोई सुराग नहीं मिला। इसी दौरान परिवार ने पुलिस को बताया कि उनका मोबाइल फोन भी गायब है। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल नंबर को ट्रैकिंग सिस्टम पर लगाया। जांच में पता चला कि फोन को लगातार कुछ-कुछ अंतराल पर चालू और बंद किया जा रहा था। इस जानकारी ने पुलिस को मामले की दिशा बदलने पर मजबूर कर दिया।

पुलिस अधिकारियों को संदेह हुआ कि यदि आतंकवादियों ने बशीर अहमद का अपहरण किया होता तो वे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए उनका मोबाइल फोन अपने साथ रखने का जोखिम नहीं उठाते। मोबाइल फोन की गतिविधियों और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस ने अपहरण की आशंका से आगे बढ़कर हत्या की संभावना पर ध्यान केंद्रित किया। इसके बाद अधिकारियों ने बशीर अहमद के घर से लेकर उनकी ड्यूटी वाली जगह के बीच के पूरे रास्ते की दोबारा बारीकी से तलाशी लेने का फैसला किया।

16 अक्टूबर की सुबह तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को सबसे पहले बशीर अहमद का मोबाइल फोन झाड़ियों में पड़ा मिला। इसके बाद कुछ दूरी पर एक नाले के पास उनकी सर्विस राइफल भी बरामद हुई। इन दोनों चीजों के मिलने से पुलिस का शक और गहरा गया। घटनास्थल के आसपास जांच करने पर पुलिसकर्मियों की नजर कुछ दूरी पर पड़ी ताजा खोदी गई मिट्टी पर गई। जमीन को खोदकर देखा गया तो उसके नीचे बशीर अहमद का शव दबा हुआ मिला। इस तरह लापता पुलिसकर्मी की तलाश का अंत एक बेहद भयावह हत्या के खुलासे के साथ हुआ।

सिर पर लोहे की रॉड से हमला, फिर जिंदा दफनाने का आरोप

शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि बशीर अहमद का अपने एक चचेरे भाई बशीर अहमद डार के साथ पहले जमीन को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि, बाद में परिवार के दूसरे सदस्यों और रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से दोनों के बीच समझौता हो गया था। पुलिस ने इस पुराने विवाद को ध्यान में रखते हुए बशीर अहमद डार और उसके बेटे नजीर अहमद डार को पूछताछ के लिए बुलाया।

शुरुआत में दोनों आरोपियों ने पुलिस के सामने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने 15 अक्टूबर को बशीर अहमद को देखा था। लेकिन जांच के दौरान जब पुलिस ने उनके मोबाइल फोन की लोकेशन का मिलान किया तो पता चला कि दोनों के फोन उसी स्थान के आसपास सक्रिय थे, जहां से बशीर अहमद लापता हुए थे। इस अहम साक्ष्य के सामने आने के बाद पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपियों के बयान बदलने लगे और अंततः उन्होंने कथित तौर पर वारदात से जुड़ी जानकारी दी।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में जमीन विवाद की पुरानी कहानी सामने आई। आरोपियों ने बताया कि बशीर अहमद के पिता गुलाम मुस्तफा ने करीब 40 मरला जमीन अपने भाई अब्दुल अजीज को बेची थी। हालांकि, गुलाम मुस्तफा की मृत्यु के बाद उनके बेटे बशीर अहमद ने इस बिक्री को मानने से इनकार कर दिया था। उनका दावा था कि उनके पिता ने यह जमीन नहीं बेची थी। इसी दावे के आधार पर उन्होंने जमीन वापस हासिल करने के लिए अदालत में मुकदमा भी दायर किया था।

इस विवाद के बढ़ने पर परिवार के दूसरे रिश्तेदारों ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को समझौते के लिए राजी किया। इसके बाद जमीन बशीर अहमद को वापस कर दी गई थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बशीर अहमद ने करीब चार से पांच साल पहले यह जमीन बेच भी दी थी। यानी जिस जमीन को लेकर दोनों परिवारों के बीच विवाद हुआ था, वह मामला काफी समय पहले ही सुलझ चुका था।

जंगल में अकेला पाकर किया हमला

पुलिस की शुरुआती जांच और आरोपियों से पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक, 15 अक्टूबर की सुबह जब बशीर अहमद अपनी ड्यूटी पूरी करके घर लौट रहे थे, तभी जंगल के रास्ते में उनकी मुलाकात बशीर अहमद डार और उसके बेटे नजीर अहमद डार से हुई। उस समय बशीर अहमद अकेले थे। आरोप है कि इसी दौरान बशीर अहमद डार ने उनसे जमीन को लेकर बहस शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और नजीर अहमद डार ने कथित तौर पर पीछे से उनके सिर पर लोहे की रॉड से वार कर दिया।

हमले के कारण बशीर अहमद जमीन पर गिर पड़े और उनके सिर से खून बहने लगा। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि बशीर अहमद के घायल होकर गिरने के बाद उन्होंने उनके मुंह में पत्थर और मिट्टी भर दी, ताकि वह शोर न मचा सकें और किसी को मदद के लिए न बुला सकें। इसके बाद उन्हें पहले से खोदे गए एक गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढक दिया गया।

जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, बशीर अहमद की मौत केवल सिर पर लोहे की रॉड से लगी चोट के कारण नहीं हुई थी, बल्कि उन्हें जिंदा ही गड्ढे में दफना दिया गया था। अधिकारी ने बताया कि यह तथ्य सामने आने के बाद पुलिसकर्मी भी स्तब्ध रह गए। उनके मुताबिक, मृतक ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में असहनीय पीड़ा झेली होगी। इस खुलासे ने पूरे मामले को और अधिक भयावह बना दिया है।

परिवार सदमे में, समझौते के बाद भी नहीं थमा विवाद

बशीर अहमद की हत्या की खबर से उनका परिवार गहरे सदमे में है। पत्नी और बेटी के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि जिस व्यक्ति के घर लौटने का वे सुबह से इंतजार कर रहे थे, उसकी इतनी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। परिवार के करीबी रिश्तेदार और पड़ोसी गुलाम रसूल ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि दोनों चचेरे भाइयों के बीच जमीन को लेकर विवाद जरूर हुआ था, लेकिन वह मामला पहले ही सुलझ चुका था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पुराना और सुलझा हुआ विवाद इस तरह की दर्दनाक घटना में बदल जाएगा।

फिलहाल पुलिस ने बशीर अहमद डार और उसके बेटे नजीर अहमद डार को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच जारी है। एक पुलिसकर्मी के लापता होने से शुरू हुई यह जांच मोबाइल फोन की लोकेशन, जंगल में मिली सर्विस राइफल और ताजा खोदी गई मिट्टी के सहारे हत्या के खुलासे तक पहुंची। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है और पारिवारिक जमीन विवाद के चलते हुई इस निर्मम वारदात ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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