झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाने से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। जिस थाने में एक महिला अपनी परेशानी लेकर इंसाफ और सुरक्षा की उम्मीद से पहुंची थी, उसी थाना परिसर में उसके साथ कथित दुष्कर्म का आरोप लगा है। महिला की शिकायत के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच शुरू कराई और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।
थाने के वायरलेस ऑपरेटर पर लगा आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला घरेलू विवाद से जुड़ी शिकायत लेकर गम्हरिया थाने पहुंची थी। इसी दौरान थाने में तैनात एक वायरलेस ऑपरेटर पर उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। आरोपी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किए जाने की भी खबर है।
थाना प्रभारी समेत पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
मामले में थाना प्रभारी समेत अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका और लापरवाही की जांच की जा रही है। शुरुआती कार्रवाई के तहत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में निलंबित कर्मचारियों की संख्या चार से छह तक बताई गई है। इसलिए अंतिम संख्या और अधिकारियों के नाम की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
एसपी के निर्देश पर जांच शुरू
रिपोर्ट्स के अनुसार, जिले के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसडीपीओ को मामले की जांच सौंपी गई है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और उस समय थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों की क्या भूमिका थी। थाना प्रभारी सहित अन्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की भी पड़ताल की जा रही है।
महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने थानों में महिलाओं की सुरक्षा और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर पीड़ित व्यक्ति न्याय की उम्मीद लेकर पुलिस थाने पहुंचता है। ऐसे में थाने के परिसर से ही इस तरह का आरोप सामने आना पुलिस की निगरानी व्यवस्था और आंतरिक अनुशासन पर सवाल खड़े करता है।
अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और शिकायतकर्ता महिला की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। पुलिस प्रशासन के सामने चुनौती है कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जाए और जांच में जिसकी भी भूमिका या लापरवाही साबित हो, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जांच के नतीजों पर टिकी नजरें
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिसकर्मियों का निलंबन विभागीय कार्रवाई है, इसे दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पुलिस प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।








