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October 29, 2026 10:08 pm

करवा चौथ पर बादलों के कारण नहीं दिखे चांद तो कैसे खोलें व्रत? जानें पूजा के वैकल्पिक तरीके

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करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए इस बार मौसम की स्थिति परेशानी का कारण बन सकती है। चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी होने के कारण आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि यदि चंद्रोदय के समय चंद्रमा दिखाई नहीं दिया, तो वे अपना व्रत कैसे खोलेंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी परिस्थिति में चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन न होने पर कुछ वैकल्पिक तरीकों से पूजा-अर्चना कर व्रत खोलने का विधान बताया जाता है।

करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन करने के बाद अर्घ्य अर्पित करने और पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है। हालांकि, मौसम खराब होने या आसमान में घने बादल छाए रहने के कारण चंद्रमा दिखाई न दे, तो महिलाएं अपने शहर में चंद्रोदय का सही समय पता कर सकती हैं। इसके बाद चंद्रमा के उदय होने की दिशा में मुख करके चंद्रदेव का स्मरण और पूजा-अर्चना की जा सकती है। ऐसी स्थिति में धार्मिक मान्यताओं और परिवार की परंपराओं के अनुसार वैकल्पिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।

भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा के दर्शन कर सकती हैं महिलाएं

यदि करवा चौथ की रात बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो महिलाएं भगवान शिव की पूजा कर सकती हैं। भगवान शिव को चंद्रमा धारण करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसे में शिवजी की ऐसी तस्वीर के दर्शन किए जा सकते हैं, जिसमें उनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हों। महिलाएं चंद्रदेव का स्मरण करते हुए पूजा-अर्चना कर सकती हैं। इसके अलावा शिव मंदिर जाकर भगवान शिव के दर्शन करने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। हालांकि, इस उपाय को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।

चंदन और चावल से चंद्रमा की आकृति बनाकर करें पूजा

चंद्रमा के दर्शन नहीं होने की स्थिति में एक थाली में सफेद चंदन और चावल की सहायता से चंद्रमा की प्रतीकात्मक आकृति बनाई जा सकती है। इसके बाद चंद्रोदय के निर्धारित समय पर चंद्रदेव का ध्यान करते हुए पूजा-अर्चना और अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा का पालन किया जा सकता है। इस उपाय को अपनाने से पहले अपने शहर में चंद्रोदय का समय जानना जरूरी है, ताकि उसी समय के अनुसार पूजा की जा सके।

लाल कपड़े पर चंद्रमा की आकृति बनाकर करें स्मरण

एक अन्य विकल्प के रूप में लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सफेद कपड़े से चंद्रमा की आकृति बनाई जा सकती है। इसके बाद चंद्रदेव का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जाप और पूजा-अर्चना की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्रकार चंद्रमा का प्रतीक बनाकर उनकी उपासना करने का विकल्प भी अपनाया जाता है। हालांकि, इस विधि को लेकर स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार अंतर हो सकता है।

चांदी के सिक्के और दर्पण की मदद से भी कर सकते हैं पूजा

यदि आसमान में बादल छाए होने के कारण चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन संभव नहीं हो पा रहे हैं, तो एक थाली में चांदी का सिक्का रखकर उसमें पानी भरा जा सकता है। इसके बाद दर्पण की सहायता से चंद्रमा का प्रतीकात्मक रूप मानकर पूजा करने का तरीका भी बताया जाता है। इस दौरान चंद्रदेव का स्मरण कर अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना की जा सकती है। इस उपाय को अपनाने वाली महिलाओं को भी चंद्रोदय के समय का ध्यान रखना चाहिए।

दूसरे शहर में चांद दिखाई दे तो वीडियो कॉल का ले सकती हैं सहारा

कई बार एक ही शहर में मौसम की स्थिति अलग-अलग हो सकती है, जबकि दूसरे शहर में आसमान साफ होने के कारण चंद्रमा दिखाई दे सकता है। ऐसी परिस्थिति में दूसरे शहर में रहने वाले परिवार के किसी सदस्य से वीडियो कॉल के माध्यम से चंद्रमा के दर्शन करने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। हालांकि, वीडियो कॉल से चंद्र दर्शन को व्रत खोलने के लिए मान्य मानने के संबंध में धार्मिक परंपराओं में एकरूपता नहीं है। इसलिए महिलाओं को अपनी पारिवारिक मान्यता और पूजा-पद्धति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन क्यों किए जाते हैं?

करवा चौथ को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ चंद्रदेव की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, चंद्रमा के दर्शन करने के बाद उन्हें अर्घ्य अर्पित किया जाता है और फिर पति के दर्शन करके व्रत खोला जाता है।

करवा चौथ पर चंद्रमा को छलनी से देखने की भी विशेष परंपरा है। पूजा के दौरान महिलाएं छलनी से चंद्रमा के दर्शन करती हैं और इसके बाद अपने पति को देखती हैं। इस परंपरा को वैवाहिक प्रेम, समर्पण और पति की लंबी आयु की कामना से जोड़कर देखा जाता है। यदि खराब मौसम के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो जल्दबाजी करने के बजाय चंद्रोदय का समय पता करना और अपनी पारिवारिक धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित रहेगा।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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