सुहागनों के सबसे बड़े पावन पर्व करवा चौथ पर इस बार मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। देश के कई हिस्सों में चक्रवाती प्रभाव और बारिश के चलते छाए घने बादलों ने महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है। दिनभर भूखे-प्यासे निर्जला व्रत रखने के बाद अब महिलाओं को रात में चांद के दीदार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, क्योंकि बादलों की लुकाछिपी के कारण तय समय पर भी चंद्रमा के दर्शन होना मुश्किल साबित हो रहा है।
मौसम की बेरुखी और चंद्रोदय का असमंजस पंचांग के अनुसार दिल्ली-एनसीआर समेत विभिन्न शहरों में चांद निकलने का अनुमानित समय रात 8:15 से 8:30 बजे के आसपास का है, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनियों और आसमान में मंडराते काले बादलों के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि महिलाओं को चंद्रदेव के दर्शन कब तक हो पाएंगे। कई इलाकों में सुबह से ही बारिश और तेज हवाओं के कारण सुहागिनों के चेहरों पर संशय की स्थिति बनी हुई है।
व्रतियों की स्थिति और धार्मिक विकल्प निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर रही महिलाओं के लिए यह स्थिति काफी बेचैनी भरी है। हालांकि, धर्म गुरुओं और ज्योतिषचार्यों का कहना है कि यदि मौसम खराब होने या बादलों के घिरे रहने के कारण चांद नजर न आए, तो महिलाओं को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है:
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समय का इंतजार: स्थानीय पंचांग में दिए गए चंद्रोदय के समय के बाद कुछ देर तक आसमान साफ होने की प्रतीक्षा की जा सकती है।
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दिशा का स्मरण: यदि इसके बावजूद चांद न दिखे, तो चंद्रमा के उदय होने की दिशा की ओर मुख करके चंद्रदेव का मानसिक स्मरण कर अर्घ्य दिया जा सकता है।
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वैकल्पिक विधियां: कुछ जगहों पर शिव मंदिर जाकर भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा के दर्शन करने या पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक पूजा कर व्रत पूरा करने का विधान भी अपनाया जाता है।
त्योहार के उत्साह के बीच मौसम की यह रुकावट व्रतियों की परीक्षा जरूर ले रही है, लेकिन महिलाओं की अटूट श्रद्धा और आस्था इस बाधा पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है।








