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October 27, 2026 4:25 pm

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सुबह का पहला कदम बन रहा दर्द की वजह? एड़ी में दर्द को न करें नजरअंदाज, प्लांटर फेशियाइटिस के हो सकते हैं संकेत

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सुबह नींद से जागने के बाद जैसे ही आप बिस्तर से उतरकर पहला कदम रखते हैं, अगर एड़ी में तेज दर्द या चुभन महसूस होती है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। कई बार यह समस्या प्लांटर फेशियाइटिस (Plantar Fasciitis) के कारण हो सकती है। यह पैरों की एक आम समस्या है, जिसमें एड़ी के निचले हिस्से में दर्द होता है। खास बात यह है कि दर्द सुबह उठने के बाद पहले कुछ कदमों में ज्यादा महसूस हो सकता है। कुछ देर चलने पर दर्द कम हो जाता है, लेकिन लंबे समय तक खड़े रहने या आराम के बाद दोबारा चलने पर यह फिर बढ़ सकता है।

प्लांटर फेशियाइटिस को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि हमारे पैर के तलवे में ऊतकों की एक मजबूत पट्टी होती है, जिसे प्लांटर फेशिया कहा जाता है। यह एड़ी की हड्डी को पैर की उंगलियों के आधार से जोड़ती है और चलते समय पैर को सहारा देने में मदद करती है। जब इस हिस्से पर बार-बार दबाव पड़ता है या इसमें जलन और छोटे स्तर पर ऊतक क्षति विकसित होती है, तो एड़ी में दर्द की समस्या हो सकती है।

सुबह उठते ही एड़ी में दर्द क्यों होता है?

रात में सोते समय पैर लंबे समय तक आराम की स्थिति में रहता है। सुबह जब व्यक्ति अचानक खड़ा होकर चलना शुरू करता है, तो प्लांटर फेशिया पर खिंचाव पड़ता है। इससे एड़ी में तेज दर्द या चुभन महसूस हो सकती है। आमतौर पर दर्द एड़ी के निचले हिस्से में होता है और कभी-कभी पैर के तलवे के आगे की ओर भी महसूस हो सकता है।

हालांकि, हर बार एड़ी में दर्द होने का कारण प्लांटर फेशियाइटिस ही नहीं होता। चोट, अन्य मांसपेशियों या टेंडन से जुड़ी समस्याएं और कुछ दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी एड़ी के दर्द की वजह बन सकती हैं। इसलिए दर्द लगातार बना रहे या बढ़ता जाए, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

प्लांटर फेशियाइटिस के प्रमुख लक्षण

इस समस्या का सबसे आम लक्षण सुबह उठने के बाद पहले कुछ कदमों में एड़ी में दर्द होना है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठने के बाद खड़े होने पर दर्द महसूस हो सकता है। देर तक खड़े रहने, ज्यादा चलने या दौड़ने के बाद भी परेशानी बढ़ सकती है। कुछ लोगों को एड़ी के निचले हिस्से में दबाव डालने पर दर्द महसूस होता है।

लक्षणों की तीव्रता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। किसी को हल्का दर्द होता है, जबकि कुछ लोगों के लिए चलना और रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो सकता है। अगर दर्द के कारण चलने में परेशानी हो रही है, तो खुद से इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

किन लोगों में बढ़ सकता है इसका खतरा?

प्लांटर फेशियाइटिस की समस्या उन लोगों में अधिक देखने को मिल सकती है, जिन्हें लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है। अचानक दौड़ना शुरू करना, शारीरिक गतिविधि की मात्रा तेजी से बढ़ाना, लंबे समय तक कठोर सतह पर चलना या ऐसे जूते पहनना जिनमें पर्याप्त सहारा न हो, जोखिम बढ़ा सकते हैं। पैर की बनावट और उम्र जैसे कारक भी भूमिका निभा सकते हैं।

अगर रोजाना काम के दौरान पैरों पर लगातार दबाव पड़ता है, तो उचित जूते पहनना और गतिविधियों के बीच आराम करना महत्वपूर्ण है। दर्द शुरू होने पर उसे नजरअंदाज करते हुए लगातार भारी गतिविधियां करते रहना परेशानी बढ़ा सकता है।

एड़ी के दर्द से बचाव के लिए क्या करें?

एड़ी में दर्द होने पर सबसे पहले पैरों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने की कोशिश करें। आरामदायक जूते पहनें, जिनमें तलवे को पर्याप्त सहारा मिले। नंगे पैर कठोर फर्श पर लंबे समय तक चलने से बचें, खासकर अगर इससे दर्द बढ़ता हो।

पैरों और पिंडली की हल्की स्ट्रेचिंग कुछ लोगों को राहत देने में मदद कर सकती है। इसे धीरे-धीरे करें और दर्द बढ़ने पर रोक दें। प्रभावित हिस्से पर कपड़े में लपेटकर ठंडी सिकाई थोड़े समय के लिए की जा सकती है। लंबे समय तक खड़े रहने या दौड़ने से दर्द बढ़ता हो, तो कुछ समय के लिए ऐसी गतिविधियों को सीमित करें।

अगर दर्द लगातार बना रहता है, बार-बार लौटता है या रोजमर्रा के काम प्रभावित करता है, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें। उपचार में जरूरत के अनुसार स्ट्रेचिंग, फिजियोथेरेपी, जूतों में सहायक इनसोल और गतिविधियों में बदलाव शामिल हो सकते हैं। उपचार का तरीका दर्द के कारण और उसकी गंभीरता के अनुसार तय किया जाता है।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

अगर एड़ी का दर्द कई दिनों तक बना रहे, लगातार बढ़ रहा हो या चलने में परेशानी पैदा कर रहा हो, तो चिकित्सकीय जांच कराएं। चोट लगने के बाद अचानक तेज दर्द, पैर पर वजन न रख पाना, काफी सूजन, लालिमा या बुखार जैसे लक्षण हों, तो जल्द चिकित्सा सहायता लें।

सुबह उठते ही एड़ी में दर्द होना प्लांटर फेशियाइटिस का संकेत हो सकता है, लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है। समय पर ध्यान देने, पैरों को उचित सहारा देने और जरूरत के अनुसार उपचार लेने से इस समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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