नई दिल्ली: “हाथ में तिरंगा था और मैं शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रहा था। तभी अचानक चेहरे और शरीर पर तेज धमाके जैसा महसूस हुआ। जब आँख खुली तो मैं एम्स (AIIMS) के अस्पताल के बिस्तर पर था। डॉक्टर कह रहे हैं कि दाहिनी आंख से दिखने की संभावना बेहद कम है और शरीर के अंदर 200 से ज्यादा धातु के छर्रे फँसे हुए हैं। समझ नहीं आ रहा कि मेरा क्या कसूर था…” — यह दर्दनाक आपबीती 19 वर्षीय छात्र साहिल लोछब की है।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन की चपेट में आए साहिल का जीवन एक ही पल में बदल गया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा और भविष्य में पुलिस बल में जाने का सपना देखने वाला यह छात्र अब अस्पताल के चक्कर काटने और न्याय के लिए गुहार लगाने को मजबूर है।
खौफनाक मंज़र: “चेहरा सुन्न हो गया था और हाथ में सिर्फ खून”
नजफगढ़ के रहने वाले साहिल लोछब ने अपने साथ घटी उस दर्दनाक घटना की जानकारी देते हुए बताया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन आयोजित हुआ था। जब छात्र ‘संसद चलो’ मार्च की ओर बढ़ रहे थे, तभी अचानक हंगामा शुरू हुआ और सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई कार्रवाई की चपेट में साहिल आ गया।
साहिल ने बताया:
“मैंने हाथ में राष्ट्रीय ध्वज थाम रखा था। दोपहर बाद अचानक ऐसा लगा जैसे किसी ने बारूद या लोहे के छोटे-छोटे कंकड़ चेहरे पर दे मारे हों। बांह सुन्न पड़ गई और आंख से खून बहने लगा। मैंने हाथ से अपनी आंख दबाई और बदहवासी की हालत में भागकर एक राहगीर की बाइक पर बैठकर अस्पताल पहुँचा। इसके बाद मुझे कुछ याद नहीं, जब होश आया तो मैं AIIMS ट्रॉमा सेंटर में था।”
200 से ज्यादा छर्रे, दिल के पास भी फँसा है पैलेट
चिकित्सकीय जांच और AIIMS की रिपोर्ट के अनुसार, साहिल के शरीर में 200 से अधिक धातु के छर्रे (pellets) लगे हैं।
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आंख को भारी नुकसान: साहिल की दाहिनी आंख में 3 पैलेट घुसे हुए हैं, जिससे कॉर्निया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। डॉक्टरों ने सर्जरी की है, लेकिन दृष्टि वापस आने की संभावना बहुत कम बताई गई है।
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दिल और फेफड़ों के पास छर्रे: डॉक्टरों के अनुसार, कई छर्रे साहिल के सीने, चेहरे, गर्दन और दाहिने कंधे में धंसे हुए हैं। इनमें से एक पैलेट दिल के पास (Pericardial Fat) और एक फेफड़े में फँसा है, जिन्हें निकालना बेहद जोखिम भरा है।
FIR दर्ज कराने के लिए संघर्ष और राजनीतिक घमासान
घटना के हफ्तों बाद भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज न होने पर साहिल और उसके परिवार को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। 14 अगस्त को साहिल ने पुलिस में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन काफी दिनों तक इस मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी खुद साहिल और उनकी मां के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे और धरने पर बैठ गए। घंटों चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं (118 और 125) के तहत FIR दर्ज की।
दिल्ली पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की ओर से पैलेट गन के इस्तेमाल पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
छिन गया वर्दी का सपना
एक मध्यमवर्गीय परिवार का बड़ा बेटा साहिल एसएससी (SSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। उसके पिता ड्राइवर का काम करते हैं और परिवार की सारी उम्मीदें साहिल पर ही टिकी थीं।
आंखों में आंसू लिए साहिल कहते हैं, “मेरा सपना पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा करने का था। लेकिन आज मैं खुद पुलिस स्टेशन में न्याय मांगने खड़ा हूँ। अगर मेरी आंख की रोशनी ही नहीं रही, तो मेरा वह सपना हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।”








