चाय या कॉफी में चीनी की जगह आर्टिफिशियल या नॉन-शुगर स्वीटनर इस्तेमाल करना आजकल आम हो गया है। कई लोग इसे चीनी का बेहतर विकल्प मानते हैं, क्योंकि इन स्वीटनर्स में कैलोरी कम या नहीं के बराबर होती है। लेकिन इनके लंबे समय तक इस्तेमाल और शरीर, खासकर गट माइक्रोबायोम यानी आंतों में मौजूद बैक्टीरिया, पर असर को लेकर वैज्ञानिकों के बीच अभी भी शोध जारी है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर आर्टिफिशियल स्वीटनर निश्चित रूप से आंतों को नुकसान पहुंचाता है।
आंतों के बैक्टीरिया पर क्यों हो रही है चर्चा?
हमारी आंतों में अरबों सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये पाचन और शरीर की कई प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि कुछ नॉन-शुगर स्वीटनर्स आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम की संरचना या उसकी गतिविधि को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, हर स्वीटनर का प्रभाव एक जैसा नहीं होता और इंसानों में इसके लंबे समय के परिणामों को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्ट निष्कर्ष नहीं है।
2026 में प्रकाशित एक पशु-अध्ययन में सुक्रालोज और स्टीविया के सेवन से चूहों के गट माइक्रोबायोम और कुछ आंत संबंधी जैविक संकेतकों में बदलाव देखे गए। लेकिन यह अध्ययन चूहों पर किया गया था, इसलिए इसके परिणामों को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता।
क्या चीनी की जगह स्वीटनर लेना हमेशा गलत है?
ऐसा कहना सही नहीं है। चीनी का ज्यादा सेवन भी स्वास्थ्य के लिए समस्या पैदा कर सकता है। दूसरी ओर, विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि नॉन-शुगर स्वीटनर्स को लंबे समय तक वजन नियंत्रित करने या गैर-संचारी रोगों का जोखिम घटाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने का स्पष्ट लाभ साबित नहीं हुआ है। WHO लोगों को कुल मिलाकर खाने-पीने की चीजों में बहुत ज्यादा मीठे स्वाद की आदत कम करने की सलाह देता है।
इंसानों पर हुई रिसर्च क्या बताती है?
वैज्ञानिक प्रमाण पूरी तरह एक दिशा में नहीं हैं। 341 वयस्कों और 38 बच्चों को शामिल करने वाले एक बड़े रैंडमाइज्ड ट्रायल में कम-शुगर डाइट के हिस्से के रूप में स्वीटनर्स और sweetness enhancers का इस्तेमाल करने वाले समूह में एक साल बाद वजन घटाने को बनाए रखने में फायदा देखा गया और गट माइक्रोबायोम में कुछ बदलाव भी पाए गए। शोधकर्ताओं ने इसे स्वस्थ, कम-शुगर डाइट के संदर्भ में सुरक्षित रणनीति बताया।
इसका मतलब है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर और आंतों की सेहत के बीच संबंध जटिल है। कुछ प्रयोगों में बदलाव दिखाई दिए हैं, जबकि नियंत्रित मानव अध्ययनों में परिणाम हमेशा एक जैसे नहीं रहे हैं।
चाय में स्वीटनर लेने वालों को क्या समझना चाहिए?
अगर कोई व्यक्ति चीनी की मात्रा कम करने के लिए कभी-कभार नॉन-शुगर स्वीटनर वाली चाय पीता है, तो उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर इसे तुरंत आंतों के लिए नुकसानदायक मानना उचित नहीं है। हालांकि, रोजाना बहुत ज्यादा मीठा स्वाद लेने की आदत बनाए रखना भी बेहतर विकल्प नहीं माना जाता। WHO भी मीठे स्वाद पर निर्भरता कम करने पर जोर देता है।
साथ ही, अलग-अलग स्वीटनर्स की प्रकृति और उनका शरीर पर प्रभाव अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, WHO के अनुसार स्वीकृत स्वीटनर्स के लिए सुरक्षित सेवन सीमा निर्धारित करने के लिए संबंधित वैज्ञानिक मूल्यांकन किए जाते हैं।
निष्कर्ष
चीनी छोड़ना अच्छी बात हो सकती है, लेकिन उसकी जगह हर दिन ज्यादा मात्रा में आर्टिफिशियल स्वीटनर लेना अपने आप में हेल्दी डाइट की गारंटी नहीं है। आंतों पर इनके संभावित प्रभावों को लेकर रिसर्च जारी है और अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि सभी स्वीटनर्स गट हेल्थ को नुकसान पहुंचाते हैं।
बेहतर नजरिया यह है कि चाय में मीठे स्वाद की मात्रा धीरे-धीरे कम करने की आदत डाली जाए और पूरे खान-पान को संतुलित रखा जाए। अगर किसी खास स्वीटनर से आपको पाचन संबंधी परेशानी महसूस होती है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय किसी अभिभावक और डॉक्टर/डायटीशियन से बात करना बेहतर है।








