नागपुर: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने देश के राजनीतिक गलियारों में अचानक हलचल तेज कर दी है। नागपुर के पास एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि वे पिछले कई दशकों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं, लेकिन अब वे पहले जितना काम नहीं कर सकते और अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी को जिम्मेदारियां सौंपी जाएं।
इस बयान के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया में उनके राजनीति से संन्यास लेने और कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, विवाद बढ़ता देख गडकरी के कार्यालय (Office) ने तुरंत इस पर स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
नितिन गडकरी ने क्या कहा था?
महाराष्ट्र के नागपुर जिले के काटोल स्थित पारडसिंगा में लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ के कार्यक्रम में नितिन गडकरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
अपने भाषण के दौरान भावुक अंदाज़ में युवाओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा:
“मैं पिछले 30-35 सालों से लगातार सार्वजनिक जीवन में काम कर रहा हूँ। इस दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे और खूब काम किया। लेकिन सच यह है कि अब मैं पहले जितना काम नहीं कर सकता। अब मेरी भागीदारी और दखल कम हो गया है। मुझे लगता है कि अब नई पीढ़ी को आगे आकर काम संभालना चाहिए और पुरानी पीढ़ी को उनका मार्गदर्शन करना चाहिए।”
राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म
गडकरी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में हाल ही में नई संगठनात्मक नियुक्तियों और आगामी केंद्रीय कैबिनेट फेरबदल की खबरें चर्चा में थीं।
जैसे ही यह बयान मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, कयास लगाए जाने लगे कि क्या 69 वर्षीय नितिन गडकरी चुनावी राजनीति से दूरी बनाने की योजना बना रहे हैं या मोदी सरकार के मंत्रिमंडल से बाहर होने का संकेत दे रहे हैं।
गडकरी के दफ्तर की सफाई: ‘ट्रस्ट के कामकाज से था बयान का मतलब’
बयान पर बढ़ती बहस और अफवाहों को देखते हुए नितिन गडकरी के कार्यालय ने सोशल मीडिया और प्रेस नोट के जरिए स्थिति साफ की।
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संस्था से जुड़ा बयान: ऑफिस की ओर से कहा गया कि गडकरी के इस बयान का राजनीति या उनके मंत्री पद से कोई लेना-देना नहीं है।
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लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट: वे दरअसल ‘लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट’ के सामाजिक कार्यों और दूरदराज के आदिवासी इलाकों में चलने वाले एकल विद्यालयों की जिम्मेदारी युवाओं को सौंपने की बात कर रहे थे, जिसकी स्थापना उन्होंने खुद की थी।
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गलत व्याख्या से बचें: गडकरी के ऑफिस ने मीडिया से अपील की कि उनके सामाजिक और ट्रस्ट संबंधी भाषण को राजनीतिक संन्यास से जोड़कर गलत संदर्भ में न दिखाया जाए।
फिटनेस और लाइफस्टाइल पर दी सलाह
कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने अपनी निजी दिनचर्या का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बाद उन्होंने अपनी जीवनशैली में बड़ा बदलाव किया है। वे रोज सुबह उठकर ढाई घंटे योग, प्राणायाम और एक्सरसाइज करते हैं।
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि पैसा और ताकत तब तक किसी काम की नहीं है, जब तक आपकी सेहत अच्छी न हो। इसलिए हर किसी को अपनी फिटनेस पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र के दूरदराज के आदिवासी गांवों में सड़क, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को अपनी प्राथमिकता बताया।
निष्कर्ष:
गडकरी के इस बयान पर भले ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों की आंधी आई हो, लेकिन उनके दफ्तर की सफाई से यह स्पष्ट हो गया है कि वे अपने सामाजिक ट्रस्ट के नेतृत्व में बदलाव की बात कर रहे थे, न कि चुनावी राजनीति को अलविदा कहने की।








