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August 24, 2026 12:58 pm

चीनी की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन! सरकार बोली- रेड रॉट और अल नीनो से घटा उत्पादन, सप्लाई पर दबाव

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नई दिल्ली: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को चीनी की औसत कीमत करीब ₹48.18 प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गई। यानी करीब एक महीने में खुदरा कीमत में 15 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

सरकार ने कीमतों में इस तेजी के पीछे कई कारण बताए हैं। केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री प्रल्हाद जोशी के मुताबिक, गन्ने की फसल पर रेड रॉट बीमारी और मौसम संबंधी परिस्थितियों का असर पड़ा है। सरकार ने उत्पादन अनुमान में भी बड़ी कटौती की है। साथ ही त्योहारों से पहले चीनी की मांग बढ़ने और वैश्विक बाजार में सप्लाई पर दबाव को भी कीमतों में तेजी की वजह माना गया है।

343 लाख टन से घटकर 306 लाख टन हुआ उत्पादन अनुमान

सरकार के अनुसार, मौजूदा चीनी सीजन में शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख मीट्रिक टन (LMT) उत्पादन का था। अब इसे घटाकर करीब 306 LMT किया गया है। यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में उत्पादन करीब 11 फीसदी कम रहने का अनुमान है। गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ अत्यधिक बारिश से जलभराव का भी असर पड़ा है।

सरकार का कहना है कि उत्पादन अनुमान में कमी के बावजूद देश में घरेलू जरूरत पूरी करने लायक चीनी का स्टॉक मौजूद है। भारत में आम तौर पर सालाना चीनी उत्पादन करीब 320-340 LMT और घरेलू खपत करीब 280-290 LMT रहती है। ऐसे में सरकार का दावा है कि मौजूदा स्थिति को तत्काल कमी के संकट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

अल नीनो का भी बताया गया असर

चीनी उत्पादन पर मौसम की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि गन्ने की फसल को पर्याप्त पानी और अनुकूल मौसम की जरूरत होती है। सरकार की ओर से कहा गया है कि अल नीनो से जुड़ी मौसम परिस्थितियों और पानी की उपलब्धता में बदलाव ने कृषि उत्पादन पर असर डाला है। इसके अलावा दुनिया के दूसरे चीनी उत्पादक देशों में भी मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ा है।

सरकार के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया है। 30 जून को अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में इसमें 16 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुईत्योहारों से पहले बढ़ी मांग ने बढ़ाई चिंता

भारत में आने वाले महीनों में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाई, कन्फेक्शनरी और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार के सामने एक तरफ पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और दूसरी तरफ कीमतों को नियंत्रित रखने की चुनौती है।

इसी वजह से केंद्र सरकार ने बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति

कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह कदम घरेलू बाजार में अतिरिक्त सप्लाई लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

भारत करीब एक दशक बाद इतनी बड़ी मात्रा में कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दे रहा है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब घरेलू कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और त्योहारों के दौरान मांग और बढ़ने की संभावना है।

सरकार ने इथेनॉल को बताया कीमत बढ़ने की मुख्य वजह नहीं

चीनी के दाम बढ़ने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या गन्ने से इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी की मात्रा डायवर्ट करने से घरेलू बाजार में सप्लाई कम हुई है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस दावे को खारिज किया है।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 फीसदी था, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 फीसदी रह गया। सरकार ने यह भी कहा है कि देश में बनने वाले इथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से आता है।

जमाखोरी पर भी सरकार की नजर

केंद्र ने केवल उत्पादन और आयात पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी को रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं। सरकार ने चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की है, जो 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके अलावा 1 सितंबर से बड़े थोक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार का कहना है कि कुछ कारोबारियों और बाजार मध्यस्थों की ओर से जमाखोरी और सट्टा कारोबार ने भी कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव पैदा किया है। इसलिए चीनी मिलों के स्टॉक की भौतिक जांच भी की जा रही है।

अक्टूबर से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद

सरकार ने चीनी मिलों और राज्यों से 15 अक्टूबर 2026 से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह दी है। सरकार के अनुसार, इससे अक्टूबर में सामान्य 3-4 LMT के मुकाबले 10 LMT से अधिक चीनी उत्पादन होने की उम्मीद है। इससे त्योहारों के दौरान बाजार में सप्लाई बेहतर हो सकती है।

कुल मिलाकर, चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे सरकार ने कम उत्पादन, रेड रॉट बीमारी, मौसम का असर, वैश्विक सप्लाई में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग और कुछ हद तक जमाखोरी-सट्टेबाजी को जिम्मेदार बताया है। वहीं सरकार ने साफ किया है कि देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक है और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आयात व स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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