मधेपुरा: बिहार के मधेपुरा स्थित प्रसिद्ध सिंहेश्वरनाथ मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी पर जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सुबह श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ मंदिर परिसर में भीड़ का दबाव बढ़ गया। जलाभिषेक के लिए कतार में लगे लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हुई और बैरिकेडिंग टूटने के बाद कुछ देर के लिए भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।
जलाभिषेक के लिए सुबह से लगी थी लंबी कतार
सावन की अंतिम सोमवारी होने के कारण सिंहेश्वरनाथ मंदिर में देर रात से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। सरकारी पूजा के बाद मंदिर के पट खोले गए और इसके बाद बड़ी संख्या में लोग भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कतार में लगने लगे। सुबह होते-होते श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ गई।
मंदिर में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों के बीच श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान कतार में भीड़ का दबाव बढ़ने लगा और लोगों के बीच आगे निकलने को लेकर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
बैरिकेडिंग टूटते ही मची अफरा-तफरी
रिपोर्टों के मुताबिक, भीड़ के दबाव के कारण मंदिर परिसर में लगी बैरिकेडिंग टूट गई। इसके बाद कुछ समय के लिए स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई। कई श्रद्धालु अपना संतुलन खोकर गिर गए और कुछ लोगों के एक-दूसरे के ऊपर गिरने की स्थिति भी बनी।
इस दौरान महिला और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों को चोटें आईं। अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या अलग-अलग बताई गई है; शुरुआती रिपोर्टों में करीब 5 से 8 श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
महिला समेत कई श्रद्धालु घायल
अफरा-तफरी के दौरान कई श्रद्धालु गिरकर घायल हुए। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, एक महिला के ग्रिल से टकराने के कारण सिर में चोट आई। वहीं कुछ महिला और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ से बाहर निकाला।
भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। पुलिसकर्मी की वर्दी तक फटने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया
घटना के बाद घायलों को तत्काल इलाज के लिए जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सा टीम ने घायलों का उपचार शुरू किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, घटना में किसी बड़े जनहानि की सूचना नहीं है और प्रशासन ने जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया।
घटना की सूचना मिलने के बाद मधेपुरा के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक समेत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अतिरिक्त पुलिस बल की मदद से भीड़ को दोबारा व्यवस्थित कतार में लगाया गया।
करीब आधे घंटे में स्थिति पर पाया गया काबू
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन और पुलिस की मशक्कत के बाद करीब आधे घंटे में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया गया और जलाभिषेक की प्रक्रिया फिर से जारी रही।
मंदिर न्यास समिति और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने, धक्का-मुक्की से बचने और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की गई।
पहले से की गई थी सुरक्षा की तैयारी
खास बात यह है कि अंतिम सोमवारी पर भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले से सुरक्षा तैयारियां की थीं। मंदिर परिसर में अधिकारियों की तैनाती, पुलिस बल की व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की तैयारियां की गई थीं।
प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास को व्यवस्थित रखने की योजना बनाई गई थी। इसके बावजूद अचानक बढ़े भीड़ के दबाव के कारण कुछ समय के लिए हालात बिगड़ गए।
अंतिम सोमवारी पर उमड़ा आस्था का सैलाब
सावन की अंतिम सोमवारी के कारण बिहार के प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सिंहेश्वरनाथ मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ रही। लोग गंगाजल और अन्य पूजन सामग्री लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे थे।
मंदिर में हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने और जल्दबाजी नहीं करने की अपील की।
प्रशासन की चुनौती- भीड़ को सुरक्षित तरीके से संभालना
सिंहेश्वरनाथ मंदिर की घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की चुनौती को फिर सामने ला दिया है। ऐसे आयोजनों में एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर प्रवेश और निकास मार्ग, बैरिकेडिंग तथा कतार व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मंदिर में दर्शन-पूजन की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। घटना के बाद अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और मंदिर परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है।








