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August 24, 2026 12:54 pm

नशे की लत से परेशान लोगों के लिए बड़ी खबर! SMS अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा, युवाओं पर खास फोकस

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जयपुर: नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में नशे से जुड़ी समस्याओं के इलाज और काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल में मनोचिकित्सा और डी-एडिक्शन सेवाओं के जरिए शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से जुड़ी निर्भरता से बाहर निकलने में मरीजों की मदद की जाती है।

युवाओं में नशे की समस्या चिंता का विषय

नशे की आदत का असर केवल व्यक्ति की सेहत पर नहीं पड़ता, बल्कि परिवार और सामाजिक जीवन पर भी इसका असर हो सकता है। खासकर युवाओं में नशे की शुरुआत को रोकना और समय रहते उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है।

केंद्र सरकार भी युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए अभियान चला रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2026 में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत करते हुए युवाओं को नशे से दूर रखने और जरूरत पड़ने पर पुनर्वास सुविधाओं का लाभ लेने पर जोर दिया था।

शराब और तंबाकू की लत का भी इलाज संभव

नशे की समस्या को केवल इच्छाशक्ति की कमी मानना सही नहीं है। लंबे समय तक किसी नशीले पदार्थ का सेवन करने वाले व्यक्ति को उसे छोड़ने के दौरान विशेषज्ञ सहायता और काउंसलिंग की जरूरत पड़ सकती है।

सरकारी नशा मुक्ति कार्यक्रमों में इलाज के साथ काउंसलिंग और सामाजिक पुनर्वास पर भी जोर दिया जाता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, नशा मुक्ति की प्रक्रिया में उपचार के बाद भी काउंसलिंग और सामाजिक जीवन में दोबारा जुड़ने में सहायता महत्वपूर्ण होती है।

तंबाकू छोड़ने के लिए भी सरकारी मदद

राजस्थान में तंबाकू छोड़ने के लिए सरकारी स्तर पर काउंसलिंग और उपचार की व्यवस्था की जा रही है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, तंबाकू उपभोक्ताओं को उनके आसपास ही उपचार और परामर्श उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) को भी निःशुल्क दवा योजना में शामिल किया गया है।

राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत देशभर में तंबाकू मुक्ति केंद्रों पर काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार दवा आधारित उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

SMS में विशेषज्ञों की मदद

SMS अस्पताल में मनोचिकित्सा विभाग के तहत नशे से संबंधित समस्याओं का उपचार किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अस्पताल में शराब की निर्भरता और डी-एडिक्शन से जुड़ी सेवाएं भी शामिल हैं।

नशे की गंभीर समस्या वाले मरीजों के लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार और काउंसलिंग की योजना तय कर सकते हैं। लंबे समय से नशे का सेवन कर रहे व्यक्ति के लिए अचानक खुद से बदलाव करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

परिवार की भूमिका भी अहम

नशे की समस्या से बाहर निकलने में परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण हो सकता है। मरीज को शर्मिंदा करने या लगातार ताने देने के बजाय उसे विशेषज्ञ से मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना बेहतर तरीका है।

अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि नशे की आदत उसके स्वास्थ्य, पढ़ाई, काम या परिवार पर असर डाल रही है, तो समय रहते डॉक्टर या काउंसलर से संपर्क करना चाहिए। इलाज और काउंसलिंग की मदद से नशे की निर्भरता से बाहर निकलने की कोशिश की जा सकती है।

नशा छोड़ना संभव है

नशे की लत गंभीर समस्या जरूर है, लेकिन इससे बाहर निकलने के रास्ते मौजूद हैं। सरकारी कार्यक्रमों में उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास को एक साथ महत्व दिया जाता है।

SMS अस्पताल में उपलब्ध डी-एडिक्शन सेवाएं भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। युवाओं और उनके परिवारों के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि नशे की समस्या को छिपाने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ की मदद ली जाए और उपचार की प्रक्रिया शुरू की जाए।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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