नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में फिटनेस का स्तर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदला है। मैदान पर खिलाड़ियों की ताकत, मांसपेशियों और एथलेटिक क्षमता को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है। इसी बीच कुछ दावों ने क्रिकेट जगत में सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या बेहतर फिजीक और तेजी से मसल्स बनाने के लिए कुछ क्रिकेटर प्रतिबंधित या प्रदर्शन बढ़ाने वाले पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं?
हालांकि, इस तरह के दावों को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि किसी खिलाड़ी के बारे में बिना आधिकारिक जांच या विश्वसनीय सबूत के यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसने ड्रग्स या प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल किया है। सोशल मीडिया या अनाम दावों के आधार पर किसी क्रिकेटर पर ऐसा आरोप लगाना सही नहीं होगा।
फिटनेस के लिए क्या करते हैं क्रिकेटर?
आज के दौर में प्रोफेशनल क्रिकेटरों की फिटनेस सिर्फ जिम में वजन उठाने तक सीमित नहीं है। खिलाड़ियों के ट्रेनिंग प्रोग्राम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, स्पीड और एजिलिटी ड्रिल्स, रिकवरी, पर्याप्त नींद और संतुलित पोषण जैसी चीजें शामिल होती हैं।
खिलाड़ियों की डाइट भी उनकी ट्रेनिंग और मैच शेड्यूल के हिसाब से तैयार की जाती है। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स जैसे पोषक तत्वों का संतुलित सेवन शरीर को ट्रेनिंग से रिकवर करने और प्रदर्शन बनाए रखने में मदद करता है।
ड्रग्स और प्रतिबंधित पदार्थों का मुद्दा क्यों गंभीर है?
खेलों में प्रदर्शन बढ़ाने वाले प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल एक गंभीर मामला माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के डोपिंग टेस्ट किए जाते हैं और प्रतिबंधित पदार्थों की सूची के आधार पर जांच की जाती है।
किसी खिलाड़ी के सैंपल में प्रतिबंधित पदार्थ पाए जाने पर संबंधित खेल संस्था अपने नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। इसलिए केवल किसी खिलाड़ी की बदली हुई बॉडी या बेहतर फिटनेस देखकर यह कहना कि उसने किसी प्रतिबंधित पदार्थ का इस्तेमाल किया है, वैज्ञानिक या कानूनी तौर पर पर्याप्त आधार नहीं है।
क्या ज्यादा मसल्स का मतलब ड्रग्स है?
ऐसा मानना सही नहीं है। किसी खिलाड़ी की फिजीक कई चीजों पर निर्भर करती है—जेनेटिक्स, ट्रेनिंग, खान-पान, रिकवरी, उम्र और लंबे समय तक की गई कंडीशनिंग इसका हिस्सा हो सकती है।
एक प्रोफेशनल क्रिकेटर के लिए मजबूत शरीर का उद्देश्य केवल दिखावट नहीं, बल्कि तेज गेंदबाजी, बल्लेबाजी, फील्डिंग और लंबे समय तक मैदान पर प्रदर्शन करने की क्षमता बढ़ाना होता है।
दावों की पुष्टि जरूरी
फिटनेस और ड्रग्स को लेकर सामने आने वाले किसी भी दावे को तथ्यों की कसौटी पर देखना जरूरी है। यदि किसी खिलाड़ी के खिलाफ डोपिंग या प्रतिबंधित पदार्थ के इस्तेमाल का आधिकारिक मामला सामने आता है, तो संबंधित खेल संस्था की जांच और रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है।
फिलहाल केवल किसी दावे या सोशल मीडिया चर्चा के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि भारतीय क्रिकेटर अच्छी बॉडी बनाने के लिए ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं।
इसलिए क्रिकेटरों की फिटनेस को लेकर उठे इस दावे की सच्चाई जानने के लिए आधिकारिक डोपिंग रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और विश्वसनीय स्रोतों को ही आधार माना जाना चाहिए।








