तुर्किये। ईरान को लेकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच तुर्किये ने अपने रुख को स्पष्ट किया है। तुर्किये ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ हुए रक्षा समझौते को लेकर कहा है कि यह किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है। तुर्किये की इस सफाई को खास तौर पर ईरान से जुड़ी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग बढ़ने के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुई थीं। ऐसे माहौल में तुर्किये का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ईरान समेत पश्चिम एशिया के कई देश इन बदलते रक्षा समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं।
रक्षा सहयोग को लेकर बढ़ी थी चर्चा
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को लेकर सामने आई खबरों के बाद यह सवाल उठने लगा था कि इस साझेदारी का क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा। पश्चिम एशिया में पहले से ही कई देशों के बीच तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा मौजूद है।
ऐसे में किसी नए रक्षा समझौते को लेकर यह आशंका स्वाभाविक है कि उसका असर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है। इसी संदर्भ में तुर्किये ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी देश को निशाना बनाना नहीं है।
ईरान को लेकर क्यों उठे सवाल?
ईरान पश्चिम एशिया की प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियों में से एक है। सऊदी अरब और ईरान के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंधों में सुधार की कोशिशें जरूर हुई हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा को लेकर कई मुद्दे अब भी संवेदनशील हैं।
इसी वजह से सऊदी अरब के किसी नए रक्षा सहयोग को लेकर ईरान के संदर्भ में सवाल उठना स्वाभाविक है। तुर्किये की सफाई इसी पृष्ठभूमि में अहम हो जाती है।
तुर्किये का संदेश क्या है?
तुर्किये की ओर से दिए गए संदेश का मुख्य जोर इस बात पर है कि रक्षा सहयोग को किसी विशेष देश के खिलाफ गठबंधन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। तुर्किये का कहना है कि क्षेत्रीय देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग का उद्देश्य अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना हो सकता है, लेकिन इसे किसी तीसरे देश के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
इस बयान से तुर्किये ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब की बढ़ती नजदीकी
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग भी पुराना है। ऐसे में नए रक्षा समझौते को दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों की निरंतरता के रूप में भी देखा जा सकता है।
पाकिस्तान की पश्चिम एशिया में भूमिका और सऊदी अरब की क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए दोनों देशों के बीच किसी भी बड़े रक्षा सहयोग का असर व्यापक स्तर पर चर्चा का विषय बनता है।
पश्चिम एशिया में बदल रहे समीकरण
ईरान, सऊदी अरब, तुर्किये और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के बीच संबंधों में पिछले कुछ समय में लगातार बदलाव देखने को मिले हैं। एक ओर कई देश आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में भी नई साझेदारियां सामने आ रही हैं।
इसी कारण सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को केवल द्विपक्षीय समझौते के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा?
तुर्किये की सफाई से फिलहाल ईरान को लेकर उठ रही आशंकाओं को कम करने की कोशिश जरूर हुई है, लेकिन इस रक्षा सहयोग का वास्तविक क्षेत्रीय प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। खासकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच सुरक्षा सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका क्षेत्रीय कूटनीति पर क्या असर पड़ता है।
फिलहाल तुर्किये का संदेश साफ है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते को किसी तीसरे देश के खिलाफ कदम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। ईरान को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच तुर्किये की यह सफाई क्षेत्रीय तनाव को लेकर उसके रुख को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।








