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August 9, 2026 11:28 am

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को समान सिविल संहिता प्रारूप समिति ने सौंपा यूसीसी का ड्राफ्ट

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जयपुर।   राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर प्रक्रिया एक अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। समान सिविल संहिता प्रारूप समिति ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को UCC का ड्राफ्ट सौंप दिया है। समिति की ओर से तैयार किए गए इस प्रारूप के मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद अब राजस्थान में समान नागरिक संहिता को लेकर आगे की प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

UCC का मुद्दा लंबे समय से देश की राजनीति और कानून व्यवस्था में चर्चा का विषय रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग समुदायों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और परिवार से जुड़े कुछ नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है।

समिति ने तैयार किया प्रारूप

समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति ने विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के बाद अपना ड्राफ्ट तैयार किया। समिति की ओर से मुख्यमंत्री को प्रारूप सौंपे जाने के बाद अब सरकार इसके प्रावधानों का अध्ययन करेगी।

ड्राफ्ट में किन-किन विषयों को शामिल किया गया है और राजस्थान में इसे किस स्वरूप में लागू करने का प्रस्ताव है, यह जानकारी सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

क्या है समान नागरिक संहिता?

समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code का मतलब देश या राज्य के नागरिकों के लिए व्यक्तिगत नागरिक मामलों में समान कानून की व्यवस्था से है। इसके दायरे में आम तौर पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और गोद लेने जैसे विषयों को लेकर चर्चा होती है।

वर्तमान में भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए कई व्यक्तिगत कानून और परंपराएं लागू हैं। UCC का विचार इन नागरिक मामलों में समान नियम लागू करने से जुड़ा है।

राजस्थान में क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

राजस्थान जैसे बड़े राज्य में UCC के ड्राफ्ट का तैयार होकर मुख्यमंत्री तक पहुंचना राजनीतिक और सामाजिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सरकार के सामने इस प्रारूप की कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक समीक्षा की चुनौती होगी।

सरकार ड्राफ्ट के प्रावधानों पर विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की राय पर भी विचार कर सकती है। इसके बाद इसे लागू करने या आगे बढ़ाने को लेकर अगला कदम तय किया जाएगा।

किन मुद्दों पर रहेगी नजर?

UCC के ड्राफ्ट को लेकर सबसे ज्यादा नजर उन प्रावधानों पर रहेगी, जिनका सीधा संबंध परिवार और व्यक्तिगत कानूनों से है। विवाह की उम्र, विवाह का पंजीकरण, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार और परिवार से जुड़े नियमों जैसे विषयों पर क्या प्रावधान किए गए हैं, यह महत्वपूर्ण होगा।

इसके अलावा अलग-अलग समुदायों के मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों के साथ प्रस्तावित व्यवस्था का तालमेल कैसे बनाया जाएगा, यह भी बड़ा सवाल रहेगा।

आगे क्या होगी प्रक्रिया?

मुख्यमंत्री को ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद यह अंतिम कानून नहीं बन जाता। सरकार को इसके प्रावधानों का परीक्षण करना होगा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद ही इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजस्थान में UCC को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है। समर्थक इसे नागरिक कानूनों में समानता और एकरूपता की दिशा में कदम बता सकते हैं, जबकि विरोध करने वाले इसके सामाजिक और कानूनी प्रभावों पर सवाल उठा सकते हैं।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समान नागरिक संहिता प्रारूप समिति ने अपना ड्राफ्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दिया है। अब सरकार के स्तर पर इस प्रारूप का अध्ययन और आगे की कार्रवाई इस पूरे मुद्दे की अगली दिशा तय करेगी।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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