इंदौर, 31 मई 2026 — जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में चल रहे 34वें वार्षिक पर्यावरण संवाद सप्ताह (30 मई से 5 जून 2026) के दूसरे दिन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के संदर्भ में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की तैयारी में प्रेरणादायी संवाद हुआ।
इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, सस्टेनेबल विकास और सामूहिक जलवायु कार्रवाई पर गहन चर्चा की गई।
मुख्य अतिथि प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत रावत रहे, जबकि पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन, वन विभाग की इंदौर रेंज अधिकारी संगीता ठाकुर और अन्य विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भरत रावत द्वारा शंखनाद से हुई। इसके बाद जनक दीदी, डॉ. प्रकाश कौशल, डॉ. प्रिया एवं दिव्य द्वारा बहाई प्रार्थनाएँ पढ़ी गईं, जबकि आज़ाद पटेल ने कुरान की आयतों का पाठ किया।
स्वागत उद्बोधन में पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की स्थापना और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से उन्हें पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा मिली।
डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने अपने जीवन संघर्ष को साझा करते हुए कहा, “16 वर्ष की आयु में ओपन हार्ट सर्जरी के बाद मैंने अपना जीवन समाज और प्रकृति की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।” उन्होंने बहाई पायनियर के रूप में इंदौर आकर बरली ग्रामीण महिला विकास संस्थान की स्थापना की जानकारी दी। झाबुआ के आदिवासी क्षेत्रों में 302 रातें गाँवों में रहकर नारू उन्मूलन, स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने का अनुभव साझा किया।
उन्होंने बताया कि सोलर कुकर, सोलर किचन, जल संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा पर आधारित कार्यों से हजारों आदिवासी महिलाओं को सशक्त बनाया गया है।
मुख्य अतिथि डॉ. भरत रावत ने कहा,
“हमें यह सोचना होगा कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी पृथ्वी छोड़कर जा रहे हैं।”
डॉ. रावत ने तीन प्रमुख सिद्धांत दिए:
अहंकार-तंत्र (Egosystem) नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी-तंत्र (Ecosystem) — समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयास से ही संभव है।
भविष्य की पीढ़ियों को हर निर्णय में केंद्र में रखना चाहिए।
भौतिक सफलता को प्रगति का एकमात्र पैमाना नहीं मानना चाहिए, बल्कि स्थिरता और सामूहिक कल्याण पर ध्यान देना चाहिए।
वन रेंज अधिकारी संगीता ठाकुर ने अपने दादाजी द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए मिले पुरस्कार की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि वनों की सुरक्षा उनकी पारिवारिक परंपरा है। उन्होंने दतुनी हिल को हरा-भरा बनाने, ईको पार्क उमरीखेड़ा, देव गुराड़िया नगर वन क्षेत्र विकसित करने और विगत वर्षों में 7 लाख पेड़ लगाने की जानकारी दी।
उन्होंने जोर देकर कहा, “पेड़ लगाना सिर्फ पहला कदम है। हर पौधे की कम से कम पाँच वर्ष तक देखभाल एक बच्चे की तरह करनी चाहिए।” कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने दतुनी हिल को हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में अक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. अनुराग तिवारी ने इंदौर में जल संकट और नर्मदा पर बढ़ती निर्भरता का उल्लेख करते हुए जल संरक्षण पर बल दिया। उन्होंने दैनिक जीवन में पानी की बचत की अपील की।
इस अवसर पर बिचोली मर्दाना, सनावदिया, भोपाल, देवास सहित विभिन्न क्षेत्रों से पर्यावरण प्रेमी, शिक्षाविद्, आर्किटेक्ट, युवा स्वयंसेवी और बहाई समुदाय के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण को मात्र उत्सव न मानकर जीवनशैली का हिस्सा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। सप्ताह भर चलने वाले इस संवाद कार्यक्रम में और भी गतिविधियाँ आयोजित होंगी।








