इंदौर। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में 34वें वार्षिक पर्यावरण संवाद सप्ताह का शुभारंभ शनिवार, 30 मई को “जलवायु कार्रवाई” विषय के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत श्री वीरेंद्र गोयल, डॉ. नीरजा पौराणिक और डॉ. जनक पलटा मगिलिगन द्वारा प्रकृति को समर्पित प्रार्थनाओं के साथ की गई।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने बताया कि वर्ष 1992 से लगातार आयोजित हो रहा यह पर्यावरण संवाद अब अपने 34वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम “सामूहिक कार्रवाई” निर्धारित की गई है, जिसके अनुरूप यह संवाद सप्ताह पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

युवाओं को जलवायु कार्रवाई के लिए प्रेरित करने का प्रयास
डॉ. जनक ने कहा कि सप्ताहभर चलने वाले इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है और इसकी शुरुआत व्यक्ति को स्वयं से तथा अपने आसपास के वातावरण से करनी होगी।
अपने संबोधन में उन्होंने सतत विकास को समझने की अपनी व्यक्तिगत यात्रा भी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में अर्थ समिट में भाग लेने के दौरान उन्हें पहली बार सतत विकास की अवधारणा को गहराई से समझने का अवसर मिला। उसी अनुभव ने उन्हें पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
सूखे कुएं से शुरू हुई हरित परिसर की यात्रा
डॉ. जनक ने बताया कि उनके पति स्वर्गीय जेम्स आर. मगिलिगन के साथ मिलकर उन्होंने एक छह एकड़ के परिसर को हरित और आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित किया। इसकी शुरुआत 40 वर्ष पुराने एक सूखे कुएं को पुनर्जीवित करने से हुई थी।
आज यह परिसर प्लास्टिक-मुक्त, प्रदूषण-मुक्त, जैविक खेती आधारित और पूर्णतः सौर ऊर्जा संचालित हरित परिसर के रूप में जाना जाता है। यहां सोलर थर्मल किचन, वर्षा जल संचयन और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली के अनेक उदाहरण स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि 26 वर्षों के दौरान छह-छह माह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 6000 से अधिक अशिक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी युवतियों को सामुदायिक स्वयंसेवक के रूप में प्रशिक्षित किया गया। इन प्रशिक्षित युवतियों ने 500 से अधिक गांवों में सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यक्रम का उद्घाटन संबोधन फाउंडेशन के ट्रस्टी वीरेंद्र गोयल ने दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और सतत जीवनशैली को समय की आवश्यकता बताया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध बायोटेक्नोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग तिवारी ने जल और वायु संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को बचाना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
वन संरक्षण के अनुभव साझा किए
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पी. एन. मिश्रा, मुख्य वन संरक्षक, इंदौर वन प्रभाग ने पर्यावरण संरक्षण और सकारात्मक सोच की शक्ति पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि उज्जैन में पदस्थापना के दौरान प्रशासन और सामाजिक संगठनों के सहयोग से शिप्रा नदी के किनारे एक लाख पौधारोपण का कार्य सफलतापूर्वक किया गया था।
उन्होंने देवास में शंकरगढ़ पहाड़ी संरक्षण अभियान का भी उल्लेख किया और कहा कि सामूहिक प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने डॉ. जनक पलटा मगिलिगन को “सूर्य की किरण” बताते हुए कहा कि वे समाज को सतत विकास की दिशा में प्रेरित कर रही हैं।
समाज को प्रेरणा लेने की जरूरत
मालवांचल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. राम गुलाम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि समाज को जिम्मी और जनक मगिलिगन के जीवन से प्रेरणा लेते हुए पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. अनुराग तिवारी ने कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीना मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और संतुलित जीवन का आधार है।
अनेक गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
कार्यक्रम का संचालन डीएवीवी के एमएसडब्ल्यू इंटर्न निलेश चौहान ने किया। अंत में ट्रस्टी वीरेंद्र गोयल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर गुजराती कॉलेज की सेवानिवृत्त प्राध्यापक जयश्री सिक्का, कलेक्टोरेट कार्यालय के महेंद्र धाकड़, डीएवीवी की इकोनॉमिक्स इंटर्न तुहिना झा, अमर नर्गेश, मालवांचल मनोचिकित्सा के पीजी विद्यार्थी तथा सेंट पॉल इंस्टिट्यूट के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
पर्यावरण संवाद सप्ताह के दौरान जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली जैसे विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेंगे।








