कोलकाता । पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नई सरकार के शुरुआती छह महीनों के भीतर ही पिछली ममता बनर्जी सरकार के पांच पूर्व मंत्रियों को सलाखों के पीछे जाना पड़ा है। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और अनियमतताओं से जुड़े इन मामलों में गिरफ्तार किए गए नेताओं में से फिलहाल केवल एक पूर्व मंत्री ही जमानत पर बाहर आ सके हैं। इस कड़ी में सबसे पहली कार्रवाई राज्य के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस पर हुई थी, जिसके बाद परिवहन पूर्व राज्यमंत्री दिलीप मंडल, पूर्व सुधार सेवा मंत्री उज्ज्वल बिस्वास और उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री उदयन गुहा को कानून के शिकंजे में लिया गया। वहीं, इस फेहरिस्त में ताजा नाम गायक से राजनेता बने पूर्व पर्यटन और सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के राज्यमंत्री इंद्रनील सेन का जुड़ा है, जिन्हें फर्जी दुर्गा पूजा पास घोटाले में इसी हफ्ते गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार किए गए इन पांचों दिग्गजों में से केवल पूर्व मंत्री उज्ज्वल बिस्वास को ही अब तक अदालत से राहत मिल सकी है और वे जमानत पर बाहर हैं। इसके अलावा इंद्रनील सेन फिलहाल पुलिस रिमांड पर चल रहे हैं, जबकि सुजीत बोस, दिलीप मंडल और उदयन गुहा न्यायिक हिरासत में जेल की सलाखों के पीछे हैं। पूर्व मंत्री सुजीत बोस की गिरफ्तारी केंद्रीय जांच एजेंसी ने राज्य के नगर निकायों में हुए बहुचर्चित ‘कैश फॉर जॉब’ यानी नौकरियों के बदले नकद राशि वसूली घोटाले से जुड़े मामले में की थी। दूसरी ओर दिलीप मंडल, उज्ज्वल बिस्वास और उदयन गुहा पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी जांच राज्य पुलिस द्वारा की जा रही है।
इंद्रनील सेन का मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टियों से काफी संवेदनशील माना जा रहा है। वे पांचों नेताओं में अकेले ऐसे शख्स हैं जिनके खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी और कोलकाता पुलिस दोनों ही फर्जी ‘दुर्गा पूजा पास’ घोटाले की समानांतर जांच में जुटी हुई हैं। यह पूरा मामला यूनेस्को द्वारा सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा प्राप्त दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान आयोजित किए जाने वाले विशेष दौरों और टूर पैकेज से संबंधित है। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब जांच एजेंसियों की वित्तीय पड़ताल में राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम भी सामने आ गया।
जांच एजेंसी के आधिकारिक बयानों के मुताबिक इंद्रनील सेन के मालिकाना हक वाली कंपनी ‘ऑक्टेव रिकॉर्ड्स’ के बैंक खातों से लगभग 30 लाख रुपये की राशि बैंकिंग माध्यमों से पूर्व मुख्यमंत्री के खाते में हस्तांतरित की गई थी। हालांकि इस लेनदेन पर सफाई देते हुए इंद्रनील सेन ने स्पष्ट किया था कि यह भुगतान किसी भी अनिमितता का हिस्सा नहीं बल्कि पूरी तरह से व्यावसायिक रॉयल्टी का पैसा था। बहरहाल, पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की गहराई से जांच करने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने भी सेन से जुड़ी तमाम फाइलों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।








