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June 14, 2026 1:13 pm

नर्सिंग कॉलेज के 41 छात्रों ने जिम्मी मगिलिगन सेंटर में सीखी सस्टेनेबल जीवनशैली की बारीकियां

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ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच सस्टेनेबल जीवनशैली को समझने और अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल देखने को मिली। इंदौर के सनावदिया स्थित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में एक विशेष एजुकेशनल टूर का आयोजन किया गया, जिसमें नर्सिंग छात्रों ने पर्यावरण के अनुकूल जीवन के विभिन्न पहलुओं को नजदीक से समझा।

इस एजुकेशनल एक्सपोज़र प्रोग्राम के तहत सेंट फ्रांसिस कॉलेज ऑफ नर्सिंग के दूसरे और तीसरे सेमेस्टर के कुल 41 छात्रों ने सेंटर का दौरा किया। छात्रों ने सस्टेनेबिलिटी, रिन्यूएबल एनर्जी और जीरो-वेस्ट लाइफस्टाइल के व्यावहारिक मॉडल को देखा और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने साझा किया अनुभव

कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री सम्मानित और सेंटर की संस्थापक डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने छात्रों के साथ संवाद किया। उन्होंने अपने लंबे अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह सस्टेनेबल डेवलपमेंट के जरिए पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर जीवनशैली को अपनाया जा सकता है।

उन्होंने सोलर थर्मल कुकिंग और बायोगैस एनर्जी जैसी तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी हैं, बल्कि घरेलू खर्च को भी कम करती हैं। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग की चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवन अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सस्टेनेबल मॉडल्स को देखकर छात्रों ने जाना व्यवहारिक ज्ञान

दौरे के दौरान छात्रों ने ऑर्गेनिक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर आधारित जीवनशैली को करीब से देखा। सेंटर में कई प्रकार की फसलों—अनाज, दालें, मसाले, फल, सब्जियां और औषधीय पौधों—की खेती की जा रही है, जहां पक्षियों और प्राकृतिक वातावरण का संतुलन भी देखा गया।

छात्रों ने यह भी समझा कि कैसे सूरज की रोशनी, हवा, पानी और मिट्टी जैसी प्राकृतिक शक्तियों का उपयोग करके आत्मनिर्भर और केमिकल-फ्री जीवन संभव है।

सोलर एनर्जी और जीरो-वेस्ट सिस्टम ने किया आकर्षित

कार्यक्रम के दौरान छात्रों को हाइब्रिड सोलर-विंड पावर स्टेशन और विभिन्न प्रकार के सोलर कुकिंग सिस्टम दिखाए गए। इनमें बॉक्स कुकर, पैराबोलिक कुकर, फोल्डिंग कुकर और बड़ी कम्युनिटी सोलर किचन शामिल थीं, जिनमें विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया शेफ़लर डिश सिस्टम लगा हुआ था, जो सूर्य की दिशा के अनुसार स्वतः घूमता है।

इसके अलावा, छात्रों को जीरो-वेस्ट और प्लास्टिक-मुक्त जीवनशैली के फायदे भी समझाए गए। इस दौरान बताया गया कि किस तरह कचरे को कम करके और पुनः उपयोग की आदत अपनाकर पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सकता है।

इंटरैक्टिव सेशन में पूछे गए सवाल

कार्यक्रम के अंत में एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने सस्टेनेबल तकनीकों, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरणीय चुनौतियों को लेकर कई सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने उनके सवालों का विस्तार से जवाब दिया और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

डॉ. मगिलिगन की 42 वर्षों की पर्यावरण सेवा यात्रा

डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने अपनी 42 वर्षों की पर्यावरण सेवा यात्रा को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने वर्षों के प्रयास से एक ऐसा केंद्र विकसित किया, जहां लोग प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जी सकते हैं। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस पर चलाए गए वृक्षारोपण और जागरूकता अभियानों का भी उल्लेख किया।

छात्रों के लिए प्रेरणादायक अनुभव

कार्यक्रम के अंत में फैकल्टी सदस्य सुश्री सोनल नेतराम ने डॉ. मगिलिगन का धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अनुभव छात्रों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा और इससे उन्हें सस्टेनेबल जीवनशैली अपनाने की नई दृष्टि मिली है।

छात्र इस दौरे से न केवल जानकारी बल्कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी का भाव भी अपने साथ लेकर लौटे। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों—हवा, पानी, सूर्य और मिट्टी—का संरक्षण करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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