लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनावों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले में भाजपा ने 11 में से छह सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि समाजवादी पार्टी पांच सीटें जीतने की स्थिति में पहुंच गई है। तीन सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं और दो सीटों के परिणाम आने बाकी बताए गए हैं।
एक वरिष्ठ जिला अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि समाजवादी पार्टी ने लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की है। सपा उम्मीदवार कांति सिंह को निर्वाचन प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया है। मतगणना के आठ से अधिक दौर पूरे होने के बाद उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कांति सिंह को 51,168 वोट मिले, जबकि भाजपा के उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह को 36,313 वोट प्राप्त हुए।
वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा को झटका लगा है। मतगणना के नौवें दौर तक प्रथम वरीयता के मतों में सपा उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा को 50,462 वोट मिले थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार केदारनाथ सिंह को 33,478 वोट प्राप्त हुए थे। इसके बाद केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अपनी हार स्वीकार कर ली।
केदारनाथ सिंह ने मतदाताओं के समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बावजूद मतदाताओं का स्नेह, सहयोग और विश्वास उनके लिए अनमोल रहेगा। उन्होंने भाजपा और गठबंधन के नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने स्नातक समुदाय के हितों और समस्याओं के लिए काम जारी रखने का संकल्प जताते हुए कहा कि जनसेवा का दायित्व चुनाव परिणामों पर निर्भर नहीं करता।
बुधवार के अंत तक घोषित परिणामों के अनुसार, भाजपा ने आगरा स्नातक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक, लखनऊ शिक्षक, मेरठ शिक्षक, मेरठ स्नातक और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की थी। वहीं, समाजवादी पार्टी ने इलाहाबाद-झांसी स्नातक, वाराणसी शिक्षक और आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की थी।
इन 11 सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था और मतगणना मंगलवार को शुरू हुई थी। अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले इन विधान परिषद चुनावों को भाजपा और सपा के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा था।
चुनाव से पहले भाजपा के पास 11 में से छह सीटें थीं। इनमें आगरा, मेरठ-सहारनपुर और लखनऊ की स्नातक सीटें तथा बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ और मेरठ-सहारनपुर की शिक्षक सीटें शामिल थीं। समाजवादी पार्टी के पास वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी की स्नातक सीटों के साथ वाराणसी की शिक्षक सीट थी। शेष दो सीटें, आगरा और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, निर्दलीय उम्मीदवारों के पास थीं।








