मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच तुर्किये के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी शांति वार्ता का समर्थन करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए बातचीत ही सबसे प्रभावी रास्ता है। एर्दोगन ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखने की अपील की।
तुर्किये की राजधानी अंकारा में मीडिया से बातचीत के दौरान एर्दोगन ने कहा कि पश्चिम एशिया पहले ही कई संघर्षों और अस्थिरताओं का सामना कर चुका है। ऐसे में किसी भी नए टकराव से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “संवाद और समझौता ही स्थायी समाधान की कुंजी है।”
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अप्रत्यक्ष वार्ताएं तेज हुई हैं। ओमान और यूरोपीय देशों की मध्यस्थता से दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। हालांकि कई मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं।
एर्दोगन ने कहा कि तुर्किये क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो तुर्किये मध्यस्थ की भूमिका निभाने पर भी विचार कर सकता है। तुर्किये लंबे समय से पश्चिम एशिया के कई मुद्दों पर संतुलित कूटनीतिक भूमिका निभाता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एर्दोगन का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। गाजा संघर्ष, रेड सी संकट और ईरान-अमेरिका संबंधों में तल्खी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में तुर्किये सहित कई देश किसी बड़े टकराव को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, यदि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक तेल बाजार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।








