हे मनुष्य के पुत्र !
मेरी राह में यदि तुझ पर विपत्तियाँ न टूट पड़ें तो तू उन लोगों के मार्ग का अनुसरण भला कैसे कर सकेगा जो मेरी प्रसन्नता से संतुष्ट हैं। मुझसे मिलन की इच्छा में अगर तुझे परीक्षायें न आ घेरें तो भला मेरे सौन्दर्य के लिए अपने प्रेम में तू प्रकाश की प्राप्ति कैसे कर सकेगा।
बहाउल्लाह~
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