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July 16, 2024 1:51 pm

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वो सात नाम जिस पर RSS प्रमुख से लेकर PM Modi तक कर रहे चर्चा: जानिए कौन बनेगा BJP अध्यक्ष?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शपथ के बाद भाजपा में कौन बनेगा अध्यक्ष? का खेल शुरू हो गया है। संघ 60 साल से कम उम्र वाले को जिम्मेंदारी देने पर बल दे रहा है। इसके साथ ही वह संघ की पृष्टिभूमि को भी तरजीह दे रहा है।

मोदी सरकार में जेपी नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री बन जाने के बाद अब भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, यह बड़ा सवाल है। सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से पार्टी 2014 से नई पीढ़ी को आगे बढ़ा रही है, उससे एक बार फिर 60 साल से कम उम्र के नेता को पार्टी का सर्वोच्च पद मिलने की ज्यादा संभावना है। यह तय है कि जो भी अध्यक्ष होगा, वह संघ पृष्ठिभूमि (बैकग्राउंड) का होगा। अमित शाह को 2014 में 50 साल की उम्र में तो जेपी नड्डा को 2020 में 59 साल में राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली थी। यों तो मोदी के दौर वाली भाजपा में कौन क्या बनने वाला है, सही अनुमान लगाना मुश्किल होता है, लेकिन कुछ समीकरणों के आधार पर कई नामों की चर्चा चल रही है।

1- देवेंद्र फडणवीसः भाजपा की सेकंड लाइन में संभावनाओं से भरे नेता माने जाते हैं संघ पृष्ठिभूमि के 53 वर्षीय देवेंद्र फडणवीस। प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री दोनों रहते हुए संगठन और सरकार चलाने का कौशल है। पार्टी इन्हें लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान प्रभारी बनाती रही है। महाराष्ट्र में जिस तरह से नए समीकरण उभरे हैं, उससे इन्हें राज्य से हटाकर राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी मौका दिया जा सकता है।
2- विनोद तावड़ेः महाराष्ट्र में जिस तरह से भाजपा के सामने मराठा राजनीति को साधने की चुनौती है, उसमें 62 वर्षीय विनोद तावड़े को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पार्टी संदेश दे सकती है। संघ के छात्र संगठन एबीवीपी से निकले तावड़े मुंबई प्रदेश इकाई अध्यक्ष से लेकर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री तक रह चुके हैं। इस समय बतौर महासचिव दूसरे दलों के नेताओं की भर्ती से लेकर कई बड़े अभियान देख रहे।
3- सुनील बंसलः राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान निवासी 54 वर्षीय सुनील बंसल की गिनती भाजपा के परफॉर्मर नेताओं में होती है। संघ पृष्ठिभूमि के बंसल के ओडिशा और तेलंगाना का प्रभारी रहते भाजपा ने दोनों राज्यों में शानदार प्रदर्शन किया। इसके पूर्व यूपी में संगठन मंत्री रहते हुए 2014, 2017, 2019 और 2022 का चुनाव जिता चुके हैं। बंसल का ट्रैक रेकॉर्ड उन्हें अध्यक्ष पद का दावेदार बनाता है।
4- के लक्ष्मणः तेलंगाना के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और इस समय ओबीसी मोर्चा की कमान संभाल रहे हैं। संसदीय और केंद्रीय चुनाव जैसी ताकतवर समितियों में सदस्य होने की वजह से मजबूत व्यक्ति हैं। लक्ष्मण को बनाने से भाजपा न केवल दक्षिण भारत को बल्कि ओबीसी को भी साध सकती है। तेलंगाना में भाजपा की इस बार कांग्रेस से ज्यादा लोकसभा सीटें आईं हैं। राज्य के खाते में अध्यक्ष का पद डाला जा सकता है।
5- अनुराग ठाकुरः केंद्रीय मंत्रिमंडल से अप्रत्याशित रूप से बाहर होने के बाद अनुराग ठाकुर का नाम भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चर्चा में है। अनुराग की युवाओं में अच्छी लोकप्रियता है। लोकसभा चुनाव में जिस तरह से युवाओं की नाराजगी बड़ा मुद्दा बनी, उससे उनके चेहरे को आगे कर पार्टी युवाओं को आकर्षित कर सकती है। लेकिन, नड्डा के बाद दूसरा राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हिमाचल से होगा, इस पर संशय है।
6- ओम माथुर और नरेंद्र सिंह तोमरः ओम माथुर और नरेंद्र सिंह तोमर दोनों भाजपा के बेहद वरिष्ठ नेता हैं और संगठन कौशल में माहिर माने जाते हैं। माथुर यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ से लेकर कई राज्यों में पार्टी की सरकारें बनवा चुके हैं। हालांकि, राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की राह में माथुर की 72 साल की उम्र रोड़ा है। केंद्र से राज्य की राजनीति में बतौर स्पीकर भेजे गए नरेंद्र सिंह तोमर फिर से राष्ट्रीय राजनीति में आएंगे, यह बड़ा सवाल है।

ये नाम भी चर्चा में

यों तो संगठन महामंत्री बीएल संतोष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह, सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश का भी नाम चर्चा में है। लेकिन ये तीनों प्रचारक संघ के प्रतिनिधि के रूप में भाजपा में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे हैं। संगठन महामंत्रियों को अध्यक्ष बनाने का कोई उदाहरण नहीं है। क्योंकि, रामलाल की तरह संघ आवश्यकता के अनुरूप प्रचारकों को वापस बुला लेता है। भाजपा अगर महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का निर्णय लेती है तो फिर तेलंगाना से डी पुरुंदेश्वरी, हरियाणा से सुधा यादव, तमिलनाडु से वनिथि श्रीनिवाससन, छत्तीसगढ़ की सरोज पांडेय की भी दावेदारी बनती है।

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कौन-सा फॉर्मूला चलेगाः अटकलें जारी

फॉर्मूला 1- चूंकि केंद्र में सरकार की कमान ओबीसी चेहरे के हाथ है तो पार्टी की कमान कोर वोटर माने जाने वाले सामान्य वर्ग को मिलने की ज्यादा संभावना है।

फॉर्मूला 2-राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले अमित शाह और जेपी नड्डा राष्ट्रीय महासचिव रहकर अनुभव अर्जित कर चुके थे। यह फॉर्मूला चला तो किसी महासचिव को ही मौका मिलेगा।

 

फॉर्मूला 3-लोकसभा चुनाव में झटका लगने के बाद यदि पार्टी दलित या ओबीसी समुदाय को साधना चाहेगी तो इस वर्ग से कोई चेहरा हो सकता है।

फॉर्मूला 4- जिस तरह से लोकसभा चुनाव में दक्षिण में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा है तो तो पार्टी यहां से किसी चेहरे को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर बड़े संदेश दे सकती है।
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