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November 3, 2026 3:56 pm

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निर्धारित विरोध स्थल पर अनिश्चितकालीन कब्जे का कोई अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति, समूह या संगठन किसी निर्धारित विरोध स्थल पर अनिश्चित काल के लिए कब्जा जमाने का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि अन्य नागरिकों को भी अपनी चिंताओं और मांगों को उठाने के लिए उसी सार्वजनिक स्थान का उपयोग करने का समान संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। 

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी स्थान पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति को हमेशा के लिए कब्जा करने के लाइसेंस के रूप में नहीं देखा जा सकता। अदालत ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक स्थानों को निर्धारित अवधि के लिए ही इस्तेमाल की इजाजत मिलनी चाहिए ताकि किसान, व्यापारी और अन्य नागरिक भी अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें।

यह मामला Cockroach Janata Party के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़े कई आवेदनों पर सुनवाई के दौरान सामने आया। इन याचिकाओं में बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने, पुलिस की अत्यधिक सख्ती, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और मेट्रो स्टेशनों को बंद करने जैसे मुद्दे उठाए गए थे। इसके अलावा व्यापारी संगठनों की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि लंबे समय तक चले इन प्रदर्शनों से राजधानी के व्यापार और छोटे दुकानदारों की आजीविका पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने न्यायालय से आग्रह किया कि व्यापार करने के अधिकार और दैनिक वेतनभोगियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक शांति बनाए रखने के ठोस उपाय किए जाएं।

अदालत ने इस मामले पर संतुलन बनाते हुए कहा कि विरोध करने का अधिकार और व्यापार व आजीविका कमाने का अधिकार दोनों ही संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त प्रतिस्पर्धी दावे हैं। पीठ ने दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखते हुए कहा कि रास्ता ऐसा निकाला जाना चाहिए जिससे दूसरों की रोजी-रोटी प्रभावित हुए बिना शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो सकें।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सूचित किया कि केवल एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय तक कब्जा जमाए रखा और बिना अनुमति आगे की मार्च का आह्वान किया। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को प्रभावित पक्षों को मामले में शामिल करने और वित्तीय नुकसान का विवरण पेश करने के निर्देश देते हुए आगे की विस्तृत सुनवाई के लिए योजना बनाई है।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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