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October 29, 2026 7:38 pm

यूपी: सरकारी नौकरियों के लिए सत्यापन नियम सख्त, केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं किया जा सकेगा अयोग्य

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उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में भर्ती से पहले उम्मीदवारों के चरित्र और आपराधिक पृष्ठभूमि के सत्यापन के लिए एक समेकित नीति लागू की है। इसके तहत हत्या, दुष्कर्म, अपहरण, मानव तस्करी, आतंकवाद, साइबर अपराध और दस्तावेजों में जालसाजी जैसे अपराधों में संलिप्तता उम्मीदवार को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य बना सकती है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा के आधार पर उसे सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता।

नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से बुधवार को जारी शासनादेश में कहा गया है कि नई नीति 1958 से लागू विभिन्न आदेशों का स्थान लेगी। इसका उद्देश्य उम्मीदवारों के पूर्ववृत्त के सत्यापन के लिए एक समान मानदंड निर्धारित करना और भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

शासनादेश के अनुसार, राजनीतिक विचारधारा अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं होगी। हालांकि, ऐसे संगठनों से जुड़े उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जा सकता है, जिनका उद्देश्य हिंसक तरीकों से मौजूदा व्यवस्था को बदलना है।

नीति में दुष्कर्म, अपहरण, मानव तस्करी, आतंकवाद, साइबर अपराध और दस्तावेजों की जालसाजी जैसे गंभीर अपराधों के अलावा कुछ विशेष कानूनों के तहत आने वाले अपराधों को भी शामिल किया गया है। इनमें स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आने वाले अपराध शामिल हैं।

यह फैसला इलाहाबाद उच्च न्यायालय के दो मामलों में दिए गए निर्देशों के बाद लिया गया है। अदालत ने राज्य सरकार से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक फरवरी, 2012 की गाइडलाइन के अनुरूप उम्मीदवारों के सत्यापन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा था।

इससे पहले चरित्र सत्यापन की व्यवस्था के लिए 1958 का आदेश लागू था। इसके बाद 1978, 1985 और 2013 में प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा से संबंधित आदेश जारी किए गए थे। वर्ष 2021 के एक आदेश में निर्धारित सत्यापन प्रपत्र और स्व-घोषणा जमा करने के बाद अनंतिम नियुक्ति की अनुमति भी दी गई थी। नई नीति इन सभी प्रावधानों को एक साथ लाते हुए अयोग्यता के मानदंड स्पष्ट करती है।

नीति में यह भी कहा गया है कि केवल प्राथमिकी (एफआईआर), शिकायत, जारी जांच या आरोपपत्र दाखिल होने के आधार पर किसी उम्मीदवार को स्वत: अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा, यदि सक्षम अदालत ने आरोप तय नहीं किए हैं। हालांकि, कुछ विशेष अपराधों के मामलों में निर्धारित अपवाद लागू होंगे।

अंतिम रूप से बरी किए जाने या आरोपमुक्त किए जाने, कानूनी रूप से मान्य समझौते, सरकार की ओर से मुकदमा वापस लेने अथवा उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा मामला निरस्त किए जाने जैसी परिस्थितियों के लिए भी नीति में प्रावधान किए गए हैं। कुछ मामूली अपराधों के मामलों में भी निर्धारित नियमों के अनुसार राहत मिल सकती है।

शासनादेश के मुताबिक, राज्य सरकार में पहले से कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, जरूरत पड़ने पर उनके पिछले विभागों से संबंधित सेवा अभिलेख मंगाए जा सकेंगे। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और उम्मीदवारों की पात्रता तय करने में स्पष्ट मानदंडों का पालन किया जा सकेगा।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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